Ek Bagiya Maa Ke Naam’ campaign in Madhya Pradesh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से प्रेरणा लेते हुए, मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में एक महत्वाकांक्षी नई परियोजना, “एक बगिया मां के नाम”, की शुरुआत की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य मॉनसून के दौरान बड़े पैमाने पर पौधारोपण को बढ़ावा देना है, जिससे प्रदेश को हरा-भरा बनाया जा सके और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सके। इस परियोजना पर लगभग ₹1000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
मनरेगा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह पर इस महत्वपूर्ण घोषणा को सार्वजनिक किया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना विशेष रूप से स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित है। “एक बगिया मां के नाम” योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत संचालित की जाएगी। इसके अंतर्गत, प्रदेश के 30 हजार से अधिक पात्र स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों से विकसित होने वाले फलोद्यान इन महिलाओं की आर्थिक उन्नति का आधार बनेंगे, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
30 हजार एकड़ निजी भूमि पर फलोद्यान का विकास
इस परियोजना के तहत, मध्य प्रदेश की 30 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की कुल 30 हजार एकड़ निजी भूमि पर फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। ₹1000 करोड़ की लागत से आजीविका संवर्धन के लिए 30 लाख उद्यानिकी पौधों का रोपण करके बड़े पैमाने पर फलोद्यान विकसित किए जाएंगे। इस योजना के तहत लाभार्थियों को केवल पौधे ही नहीं मिलेंगे, बल्कि खाद, गड्ढे खोदने के लिए सहायता, पौधों की सुरक्षा के लिए कांटेदार तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर के जल कुंड के निर्माण के लिए भी राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इन महिला लाभार्थियों को फलोद्यान के सफल विकास और प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
15 अगस्त से शुरू होगा महाअभियान
“एक बगिया मां के नाम” परियोजना के तहत फलदार पौधारोपण का कार्य पूरे प्रदेश में एक अभियान के रूप में 15 अगस्त से शुरू होगा और 15 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान लक्षित भूमि पर व्यापक पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे यह एक जन आंदोलन का रूप ले सके। परियोजना के लिए ऐसे स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों का चयन किया जाएगा, जो फलदार पौधारोपण करने की इच्छुक होंगी। यदि चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं है, तो पौधारोपण उस महिला के पति, पिता, ससुर या पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर किया जा सकेगा।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा स्थल चयन
इस परियोजना की एक अनूठी विशेषता पौधारोपण के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया है, जो अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके की जाएगी। “एक बगिया मां के नाम” परियोजना के अंतर्गत, सिपरी सॉफ्टवेयर (SIPRI software) के माध्यम से चयनित हितग्राही की भूमि का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। यह सॉफ्टवेयर भूमि की जलवायु का विश्लेषण करेगा और यह निर्धारित करेगा कि कौन सा फलदार पौधा उस विशेष भूमि के लिए सबसे उपयुक्त है। साथ ही, यह भी पता लगाया जाएगा कि पौधा किस समय और किस प्रकार से लगाया जाना चाहिए। यदि सिपरी सॉफ्टवेयर द्वारा भूमि को पौधारोपण के लिए उपयोगी नहीं पाया जाता है, तो उस स्थान पर पौधारोपण का कार्य नहीं किया जाएगा, जिससे संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। यह तकनीक इस परियोजना की सफलता और दीर्घकालिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।