Ration distribution system collapsed in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली सवालों के घेरे में है। सरकार द्वारा शुरू की गई “चावल उत्सव योजना” का हाल बेहद चिंताजनक है। जून 2025 में प्रदेशभर में केवल 48 प्रतिशत राशन का ही वितरण हो पाया है, जबकि इस योजना के तहत लाभार्थियों को तीन महीने का राशन एक साथ मिलना था।
न गोदामों स्टॉक, न लाभार्थीयों को समय पर बुलाया
खाद्य मंत्रालय की सलाह पर शुरू की गई इस व्यवस्था में शुरू से ही कई खामियां सामने आईं। जानकारी के मुताबिक, न तो गोदामों में पर्याप्त चावल का स्टॉक मौजूद था, और न ही लाभार्थियों को समय पर उचित मूल्य की दुकानों पर बुलाया गया। ई-पॉश मशीनों का सर्वर बार-बार डाउन होना भी राशन वितरण में बाधा बन रहा है। वहीं, आज यानी 1 जुलाई से NAIC वितरण सर्वर पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
योजना की तैयारी अधूरी
प्रदेश सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर राशन वितरण की समयसीमा 20 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इससे हजारों राशन कार्ड धारकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।योजना को बिना किसी ठोस तैयारी के लागू किया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में तो लोगों से 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से पैसे की भी मांग की गई है, जो योजना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
चावल उत्सव की पुरानी व्यवस्था
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में शुरू की गई “चावल उत्सव योजना” के अंतर्गत हर माह की पहली तारीख को नियमित रूप से चावल का वितरण किया जाता था। योजना को छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 के तहत विधिवत रूप से लागू किया गया था। निगरानी समितियों का गठन, जनभागीदारी पोर्टल पर जानकारी का प्रकाशन और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी जैसी पारदर्शी व्यवस्था अब लगभग समाप्त हो चुकी है।
ढांचागत अव्यवस्था
सूत्रों के अनुसार, अचानक परिवहन ठेकेदारों और हम्मालों की संख्या में छह गुना बढ़ोतरी की मांग की गई, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं थी। आवश्यक नागरिक आपूर्ति निगम और परिवहन ठेकेदारों को इसके लिए दोषी ठहराया जा रहा। जबकि चार मालवाहक वाहनों की अनिवार्यता के चलते वितरण में और देरी हुई।
इस पूरी स्थिति से स्पष्ट है कि प्रदेश में राशन वितरण प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है और जरूरतमंद जनता को इसका सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।