राज्यसभा में विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर की बात, सिंधु जल समझौते को बताया बड़ा कदम

S Jaishankar on Operation Sindoor: आज राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के निर्णय को एक साहसिक और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया। जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ संबंधों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब दोनों देशों के बीच न दोस्ती थी और न ही सद्भावना, तो ऐसे समझौते की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते को ‘शांति की कीमत’ या ‘तुष्टीकरण की कीमत’ के रूप में देखा गया, जिसकी वजह से पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के किसानों के बजाय पाकिस्तान के पंजाब के किसानों की चिंता की गई।

आतंकवाद पर भारत का ‘नया सामान्य’ और विपक्षी दलों पर निशाना

विदेश मंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के लंबे संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत 1947 से आतंकवाद का सामना कर रहा है और दुनिया ने भारत में हुए आतंकी हमलों को देखा है। जयशंकर ने हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। उन्होंने तहव्वुर राणा और 26/11 मुंबई हमले के दोषियों को भारत लाने में मिली सफलता को भारतीय कूटनीति की जीत बताया। अमेरिका द्वारा टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ्रंट) को एक आतंकी संगठन घोषित किए जाने को भी उन्होंने भारतीय कूटनीति की सफलता का प्रमाण माना। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान यह कहा जाता था कि “दोनों ही देश आतंकवाद से पीड़ित हैं,” जो कि आज की स्थिति से बिल्कुल विपरीत है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता खारिज, डीजीएमओ चैनल से बातचीत

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के लक्ष्य निर्धारित थे और सरकार ने आवश्यक कार्रवाई की। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि अगर बातचीत होगी तो वह केवल डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) चैनल के माध्यम से ही होगी। उन्होंने खुलासा किया कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से बात कर हमलों को रोकने की गुहार लगाई थी। इसी दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने सेना को ‘एडवेंचर’ बना दिया था, जिस पर विपक्षी सदस्यों ने सदन में हंगामा किया। उपसभापति हरिवंश ने शक्ति सिंह गोहिल और संजय सिंह का नाम लेकर संसदीय मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सशक्त कूटनीति

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच किसी भी फोन कॉल से इनकार किया। जयशंकर ने बताया कि अमेरिका, सऊदी अरब समेत कई देशों के साथ भारत की बातचीत हुई और सभी कॉल रिकॉर्ड पर हैं। उन्होंने हर किसी से यही कहा कि यदि पाकिस्तान संघर्ष रोकना चाहता है, तो उसे भारतीय डीजीएमओ चैनल के माध्यम से निवेदन करना होगा। जयराम रमेश द्वारा बोलने पर उपसभापति ने उन्हें टोका, जिस पर जयशंकर ने कहा कि “वे कान खोलकर सुन लें… 12 अप्रैल से 22 जून तक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक भी फोन कॉल नहीं हुई।”

UNSC में भारत का पक्ष और विपक्ष पर तंज

जयशंकर ने बताया कि भले ही भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य न हो, लेकिन UNSC प्रमुख का बयान भारत के पक्ष में आया। उन्होंने रूस समेत कुछ देशों के बयानों का सदन में उल्लेख कर यह सिद्ध किया कि भारत की कूटनीति कितनी सफल रही है। विपक्ष द्वारा की गई टिप्पणियों के जवाब में विदेश मंत्री ने तीखा कटाक्ष किया, “जो लोग मुंबई (26/11) पर चुप रहे, वो आज हमें ज्ञान दे रहे हैं कि क्या करें।” इस पर विपक्ष के कई सदस्य खड़े हो गए और पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया, जिसे उपसभापति ने “इररेलिवेंट” कहकर खारिज कर दिया। जयशंकर ने कहा, “सर हम डिस्टर्ब नहीं होते, डिस्टर्ब वो लोग होते हैं।”

भारतीय सेना की क्षमता और ‘कांग्रेस नॉर्मल’ बनाम ‘न्यू नॉर्मल’

विदेश मंत्री ने भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता और क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को किसी के साथ की जरूरत नहीं है, वह खुद ही सक्षम है। उन्होंने नूर खान एयरबेस से लेकर विभिन्न आतंकी और सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में हुई तबाही का उल्लेख किया और कहा कि किसी के साथ की बात करना सेना का अपमान होगा। जयशंकर ने ‘न्यू नॉर्मल’ के पांच बिंदु बताते हुए ‘कांग्रेस नॉर्मल’ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर कहा कि “उन्होंने चाइना और इंडिया की एक संधि बना ली थी, चाइंडिया।” उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया, जबकि उस देश के साथ भारत का युद्ध हो चुका है। उन्होंने 3जी और 4जी के लिए चीनी कंपनियों को निमंत्रण देने और 2006 में हू जिंताओ के भारत दौरे के दौरान क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाने के समझौते पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टेलिकॉम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में चीनी कंपनियों को निमंत्रण देना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

चीन से संबंध और इतिहास की अनदेखी

जयशंकर ने विपक्ष पर चीन के साथ संबंधों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “आप जब ओलंपिक्स गए, किससे मिले, क्या बात की। मैं चीन गया था तो आतंकवाद पर बात की। मैंने किसी सीक्रेट समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “कुछ लोग जो हैं, उनका चीन ज्ञान ओलंपिक्स जाने से हुआ। वहां गए, किससे मिले, क्या एमओयू किया, उसकी तो बात ही नहीं हुई। ओलंपिक्स की क्लासरूम में कुछ बातें छूट जाती हैं, प्राइवेट क्लासेज भी लेनी पड़ती हैं। ये चीनी एंबेसडर को घर बुलाकर ट्यूशन लेते हैं।” उन्होंने चीन-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि यह रातोंरात नहीं हुआ, बल्कि यह कहना कि “ये बस मुझे पता था, और किसी को जानकारी नहीं थी,” इसका मतलब है कि “आप हिस्ट्री की क्लास में सो रहे थे।”