हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में कैद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर पैरोल मिली है। इस बार उसे 40 दिनों के लिए जेल से बाहर निकाला गया है, जिसके बाद वह भारी सुरक्षा के बीच सिरसा डेरा के लिए रवाना हो गया है। यह पिछले कुछ वर्षों में 14वीं बार है जब राम रहीम को पैरोल या फरलो पर रिहा किया गया है, जिसने एक बार फिर इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले 4 सालों में बार-बार पैरोल
गुरमीत राम रहीम को यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड जैसे जघन्य अपराधों का दोषी पाया गया है, जिसके लिए वह उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसे अगस्त 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के लिए 20 साल और 2019 में पत्रकार की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद, पिछले चार सालों में उसे बार-बार पैरोल दी गई है। इससे पहले, उसे अक्टूबर 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 30 दिन की पैरोल मिली थी, जिससे यह आरोप लगाए गए थे कि उसे राजनीतिक लाभ के लिए रिहा किया जा रहा है।
राजनीतिक संरक्षण पर सवाल
अपने लाखों अनुयायियों के कारण गुरमीत राम रहीम को पंजाब और हरियाणा की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि उसके अनुयायियों के वोटों को प्रभावित करने की क्षमता के कारण उसे राजनीतिक दलों का संरक्षण प्राप्त है। इस बार-बार मिलने वाली पैरोल को इसी राजनीतिक संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। राम रहीम चंडीगढ़ से करीब 250 किलोमीटर दूर रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी सजा काट रहा है, लेकिन नियमित पैरोल के कारण वह अक्सर जेल से बाहर रहता है।