मप्र- सरकार द्वारा इस संस्थान में 2024 में 9 एडवांस कोर्स शुरू किये गये थे। लेकिन पिछले तीन वर्षों के रिकार्ड से पता चलता है कि प्रवेश प्रतिशत 45 से 50 ही रह गया है। लगभग आधी ही सीटें ही भर पा रही है। वहीं देखा जाये तो इसमें किये गये प्लेसमेंट औसत 97 प्रतिशत अनुमानित आंकड़ों की बजाय वास्तिवक में केवल 40 से 50 प्रतिशत ही है, जबकि सरकारी लक्ष्य 80 से 90 प्रतिशत रखा गया था। इस संस्थान में विशाल बजट एवं उच्च स्तरीय सुविधा होने के बावजूद परिणाम निराशाजनक हैं। मप्र कौशल विकास प्रोजक्ट में 1515 करोड़ आवंटित किए गये, जिसमें ग्लोबल स्क्लि पार्क मुख्य केंद्र है जहां पर दस हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां पर छात्रों की प्रवेश संख्या बढ़ानें के लिये प्रतिवर्ष लाखोें रूपये प्रचार प्रसार पर खर्च किये जा रहे हैं। इसके बाद भी इस संस्थान में प्रवेश की संख्या 50 प्रतिशत से उपर नहीं पहूंच पा रही है।
रोजगार की गारंटी नहीं, छात्रों का भरोसा नहीं जीत पाया संस्थान
संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि यहां पर अभी तक गुजरात की कंपनी ही प्लेसमेंट के लिये आई है, ज्यादा स्कोप नजर नहीं आता है, इसलिये अभी भी छात्र अन्य कॉलेजों पर भरोसा जता रहे हैं। विभाग द्वारा प्रचार प्रसार तो खूब किया गया लेकिन छात्रों का भरोसा नहीं जीत पाये हैं। अब सवाल यह है कि ग्लोबल स्किल पार्क का उददेश्य मप्र के युवाओं को वर्ल्ड क्लास प्रशिक्षण देना है, इसके लिये 1515 करोंड खर्च के बाद भी छात्र क्यों दूरी बना रहे हैं, इसका कारण रोजगार की गारंटी नहीं, आंकड़ों में विसंगति, छात्रों के विश्वास में कमी और अधिकारियों का टालमटोल करने का रवैया है।
37 एकड़ के कैंपस में नहीं मिल रहे तकनीकी शिक्षा के लिये छात्र
वर्ल्ड क्लास स्कील पार्क के लिये शासन द्वारा 37 एकड में इसका निर्माण तो करवा लिया गया, लेकिन इसको लेकर कोई भी अधिकारी सजग नहीं है। जबकि इस पूरे प्रोजक्ट पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च कर भी छात्र में प्रवेश के लिये रुचि नहीं जगा पा रहे हैं। जब ग्लोबल स्क्लि पार्क के सीईओ गिरीश शर्मा से बात करनी चही तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई, जबकि इसी संस्थान के एओडी आर के आॅस्टिन ने घुमावदार अंदाज में जवाब देकर मामले से अनभिज्ञता जताई। संस्थान के हेड डिपार्टमेंट आॅस्टिन का कहना है कि प्रयास कर रहे हैं इस साल एडमिशन के लिये एक बार और तारिख बढ़ा दी गई है।