SC, ST और चाय बागान समुदायों को 1 साल की अतिरिक्त मोहलत, CM सरमा ने कहा- अवैध प्रवास रोकने की दिशा में कदम
गुवाहाटी: असम मंत्रिमंडल ने राज्य में आधार कार्ड वितरण को लेकर अहम फैसला लिया है। अब 1 अक्टूबर 2025 से वयस्कों को नया आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। हालांकि, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और चाय बागान समुदाय के वयस्कों को 1 साल की अतिरिक्त छूट दी गई है, यानी वे 1 अक्टूबर 2026 तक आधार बनवा सकेंगे।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि सितंबर 2025 में एक महीने की विंडो खोली जाएगी, ताकि जो वयस्क अब तक आधार के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे कर सकें। यह निर्णय मुख्य रूप से अवैध प्रवास, खासकर बांग्लादेश से हो रहे घुसपैठ को रोकने के मकसद से लिया गया है।
सरकार का तर्क: 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन
अधिकारियों के मुताबिक, असम में आधार सैचुरेशन दर पहले ही 100% से ऊपर है, यानी वास्तविक आबादी से ज्यादा आधार जारी किए जा चुके हैं। इससे डुप्लीकेशन और दुरुपयोग की आशंका बढ़ी है। वहीं SC, ST और चाय बागान समुदायों में यह दर अभी लगभग 96% है, इसी वजह से उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया है।
सरमा ने कहा, “यह फैसला किसी भी तरह भेदभावपूर्ण नहीं है। बल्कि यह व्यवस्था की पारदर्शिता और सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। जो वास्तविक भारतीय नागरिक छूट जाएंगे, वे जिलाधिकारियों के जरिए सत्यापन कर आधार ले सकेंगे।”
असम में आधार का सफर हमेशा जटिल रहा है। NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की प्रक्रिया ने लाखों लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके चलते कई लोग आधार कार्ड से वंचित रह गए। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों, सब्सिडी और बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच में दिक्कतें हुईं।
अब सरकार का तर्क है कि यह नीति सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवास पर रोक लगाने के लिए ज़रूरी है, लेकिन नागरिक समाज समूहों का कहना है कि इससे कई वास्तविक नागरिक भी आधार जैसी अहम पहचान से वंचित हो सकते हैं।
न्याय और सुरक्षा का टकराव
यह नीति सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन का मामला है। एक ओर असम सरकार अवैध प्रवास और घुसपैठ को रोकना चाहती है, वहीं दूसरी ओर पहचान दस्तावेज़ों की कमी से वंचित रह जाने वाले असली नागरिकों के लिए जोखिम भी मौजूद है।
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को सख्त सुरक्षा उपायों के साथ-साथ समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया भी अपनानी होगी, ताकि किसी भी समुदाय के वास्तविक नागरिक हाशिए पर न चले जाएँ।