दुनियाभर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को लेकर हो रही चर्चा के बीच, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई भी स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता. यह बयान वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत की विदेश और रक्षा नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है.
आत्मनिर्भरता: अब एक आवश्यकता
राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखना होगा. उन्होंने बताया कि आज की दुनिया में हर दिन नई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, चाहे वह महामारी हो, आतंकवाद हो या क्षेत्रीय संघर्ष. उन्होंने इस सदी को सबसे अस्थिर और चुनौतीपूर्ण बताया है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि अब आत्मनिर्भरता सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन गई है. पहले इसे एक विशेषाधिकार माना जाता था, लेकिन अब यह भारत के अस्तित्व और प्रगति के लिए अनिवार्य है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन हमारे किसानों और उद्यमियों के हितों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
रक्षा क्षेत्र में भारत का बढ़ता कद
रक्षा मंत्री ने बताया कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रक्षा क्षेत्र में किसी अन्य देश पर निर्भर रहना अब संभव नहीं है. उन्होंने भारत के रक्षा निर्यात में हुई अभूतपूर्व वृद्धि का हवाला दिया. 2014 में भारत का रक्षा निर्यात ₹700 करोड़ से भी कम था, जबकि आज यह बढ़कर लगभग ₹24,000 करोड़ हो गया है. यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रक्षा उत्पादों का खरीदार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण उत्पादक और निर्यातक भी बन रहा है.
राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की क्षमता और स्वदेशी उपकरणों की सफलता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि हमारी सेनाओं ने स्वदेशी उपकरणों का उपयोग करते हुए लक्ष्यों पर सटीक हमले किए हैं. यह दर्शाता है कि किसी भी मिशन की सफलता के लिए दूरदर्शिता, लंबी तैयारी और समन्वय अत्यंत आवश्यक हैं.
ऑपरेशन सिंदूर: वर्षों की तैयारी का परिणाम
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सिर्फ कुछ दिनों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों की रणनीतिक तैयारी और रक्षा तैयारियों का लंबा इतिहास था. उन्होंने इसकी तुलना एक एथलीट से की, जो कुछ सेकंड में दौड़ जीत लेता है, लेकिन उसकी जीत के पीछे महीनों और वर्षों की कड़ी मेहनत छिपी होती है. इसी तरह, हमारी सेनाओं ने वर्षों की तैयारी, मेहनत और स्वदेशी उपकरणों के साथ प्रभावी कार्रवाई की.