भोपाल के 4,000 गणेश पंडालों से मिलेगा भक्ति संग पर्यावरण का संदेश

भोपाल (मध्य प्रदेश)। इस बार गणेश उत्सव पर भोपाल के 4,000 से ज्यादा पंडाल न केवल भक्ति में रंगे हुए हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं। पहली बार भोपाल नगर निगम (BMC) ने पूजा के बाद निकलने वाली सामग्री (निर्माल्य) को सम्मानजनक और उपयोगी रूप में बदलने की पहल की है।

डंप से डायरेक्ट रिसाइक्लिंग प्लांट तक


दानापानी कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर एक विशेष प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है, जहां फूल, नारियल, नारियल के रेशे, अगरबत्ती की राख और अन्य पूजा सामग्री को प्रोसेस कर धूपबत्ती, अगरबत्ती, गुलाल, कोकोपीट और रस्सियां तैयार की जा रही हैं। इस पहल से प्रदूषण पर नियंत्रण तो हो ही रहा है, साथ ही करीब 100 लोगों को रोज़गार भी मिला है।

पहले पूजा सामग्री सीधे नालों या कचरा स्थलों में डाल दी जाती थी, जिससे पानी प्रदूषित होता था, दुर्गंध फैलती थी और आस्था भी आहत होती थी। अब इन पवित्र सामग्रियों का पुनर्निर्माण धार्मिक और दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में किया जा रहा है।


ऐसे हो रहा है काम

नगर निगम की टीमें शहर के 85 वार्डों से पूजा सामग्री इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचा रही हैं। इस प्रक्रिया में 10 ज़ोन और सात वाहन लगाए गए हैं। फिलहाल प्लांट में रोज़ाना करीब तीन टन सामग्री प्रोसेस हो रही है, जबकि आम दिनों में मंदिरों से करीब दो टन सामग्री आती है। यह सुविधा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित है और निगम को हर महीने लगभग पांच हजार रुपये की आय भी हो रही है।

इस पहल से न केवल पानी और हवा के प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि शहर की स्वच्छता में सुधार हुआ है और नए रोज़गार के अवसर भी पैदा हुए हैं। नगर निगम की यह कोशिश धार्मिक कचरे को जीरो-वेस्ट मॉडल की ओर ले जाने वाला एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।