ग्रहण का प्रभाव न केवल मनुष्यों पर, बल्कि देवताओं पर भी माना जाता है। इसी परंपरा के चलते रविवार को लगने वाले चंद्रग्रहण के कारण उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शयन आरती सामान्य समय से पहले की जाएगी। वहीं शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों के पट भी निर्धारित समय से पूर्व बंद कर दिए जाएंगे।
भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर इस वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण रविवार रात 9:56 बजे से प्रारंभ होगा, जो 11:48 बजे तक रहेगा। इस कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन रात 10:30 बजे होने वाली शयन आरती को 9:30 बजे ही संपन्न कर दिया जाएगा और 9:58 बजे मंदिर के द्वार बंद हो जाएंगे।
ग्रहण के बाद सोमवार प्रातः होने वाली भस्म आरती से पूर्व संपूर्ण मंदिर को जल से धोकर शुद्धिकरण किया जाएगा। भगवान का अभिषेक और शुद्धि स्नान करवाने के बाद ही भस्म आरती की जाएगी। हालांकि रविवार सुबह की भस्म आरती और अन्य पूजन-आरती पूर्व निर्धारित समय पर होंगे और श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। ग्रहण का सूतक काल रविवार दोपहर 12:58 बजे से आरंभ हो जाएगा, जो लगभग 9 घंटे तक प्रभावी रहेगा।
अन्य मंदिरों की व्यवस्था में बदलाव
ग्रहण की वजह से उज्जैन के गोपाल मंदिर, सांदीपनि आश्रम, हरसिद्धि माता मंदिर और मंगलनाथ मंदिर सहित अन्य वैष्णव मंदिरों की दिनचर्या भी परिवर्तित रहेगी। हरसिद्धि मंदिर के पुजारी राजू गिरी गोस्वामी ने बताया कि सूतक लगने से पहले माता की आरती होगी, लेकिन इसके बाद माता को स्पर्श नहीं किया जाएगा और गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। गोपाल मंदिर के पुजारी पावन शर्मा के अनुसार, सूतक के बाद मंदिर के चांदी के द्वार बंद कर दिए जाएंगे।
मंगलनाथ मंदिर के प्रशासक के.के. पाठक ने जानकारी दी कि ग्रहण के चलते गर्भगृह में प्रवेश निषिद्ध रहेगा। श्रद्धालु केवल बाहर से ही दर्शन कर सकेंगे। यहां रविवार को भात पूजन केवल सुबह 11 बजे तक ही होगा। इसी प्रकार, सांदीपनि आश्रम में भी सूतक का पालन किया जाएगा। ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे और सोमवार सुबह 5 बजे पुनः शुद्धिकरण के बाद नियमित पूजन आरंभ होगा।
ज्योतिष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा रक्तवर्णी दिखाई देगा, जिसे “ब्लड मून” कहा जाता है। इसका प्रभाव पूरे देश में रहेगा और भोपाल, इंदौर तथा ग्वालियर में भी यह ग्रहण एक ही समय पर देखा जा सकेगा। यह अशुभ समय माना जाता है, इसलिए पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। इस अवधि में ईष्टदेव के मंत्रों का जाप विशेषकर चंद्र मंत्र का जप करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
वहीं जीवाजी वैद्यशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय घटना है। इसे वेधशालाओं के टेलीस्कोप से या साफ मौसम में छत से भी देखा जा सकता है। यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा एशिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा।