नेपाल संसद पर Gen-Z प्रदर्शनकारियों के हमले में 9 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

काठमांडू: नेपाल में सोमवार को संसद परिसर के बाहर शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन हिंसा में बदल गया। न्यू बानेश्वर में “Gen-Z प्रदर्शनकारियों” (1997–2012 के बीच जन्मे) ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर और गेट फांदकर संसद भवन परिसर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने भीड़ को हटने करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस हड़कंप में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए।

कर्फ्यू लागू, विरोध कई शहरों में फैला

स्थिति बिगड़ने पर काठमांडू जिला प्रशासन ने न्यू बानेश्वर और आसपास के प्रमुख इलाकों में सोमवार दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लागू कर दिया। प्रदर्शन की लहर केवल काठमांडू तक सीमित नहीं रही, बल्कि पोखरा, बुटवल, बिराटनगर और अन्य शहरों में भी युवाओं ने सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की।

सोशल मीडिया बैन बना विरोध की चिंगारी

नेपाल सरकार ने गुरुवार को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप, एक्स (ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन कंपनियों को 28 अगस्त से सात दिन की समय-सीमा में रजिस्ट्रेशन का आदेश दिया था। लेकिन अंतिम तिथि (4 सितंबर) तक किसी भी बड़े प्लेटफॉर्म ने आवेदन नहीं दिया। इसके बाद सरकार ने बैन लागू कर दिया, जिसने युवाओं के गुस्से को भड़का दिया।

केपी शर्मा ओली ने दी सफाई

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी–लेनिनवादी) के सम्मेलन में कहा कि पार्टी “असमानताओं और अहंकार” के खिलाफ है, लेकिन कानून और संविधान का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा— “देश की स्वतंत्रता कुछ लोगों की नौकरियों से बड़ी है। नेपाल में व्यापार करके पैसा कमाना और फिर कानून का पालन न करना, यह स्वीकार्य नहीं है।