माय अस्पताल में नवजातों की मौत के बाद सरकार सख्त, जर्जर अस्पतालों को तोड़कर बनेगी नई इमारतें

इंदौर: इंदौर के माय अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजात बच्चियों की दर्दनाक मौत के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि आने वाले 2 से 3 वर्षों में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े पुराने अस्पताल भवनों को तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इंदौर के लिए 700 करोड़ और रीवा के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी इसी तरह का काम शुरू किया जाएगा।

पुराने ढांचे बने हादसों की वजह
30 और 31 अगस्त को माय अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती दो बच्चियों को चूहों ने काट लिया था। दोनों की हालत बिगड़ने के बाद 2 और 3 सितंबर को उनकी मौत हो गई। इस घटना ने न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला दिया। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं की जड़ अस्पतालों की जर्जर इमारतें हैं। उन्होंने कहा, “कई अस्पताल 60 से 70 साल पुराने ढांचों में चल रहे हैं। यही वजह है कि चूहों और अन्य समस्याओं पर काबू नहीं पाया जा सका।”

पुनर्निर्माण की योजना और आगे की कार्रवाई
राज्य सरकार ने तय किया है कि इंदौर और रीवा के साथ-साथ भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के मेडिकल कॉलेजों में भी भवनों को तोड़कर नए अस्पताल तैयार किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके साथ ही राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में चूहों और अन्य संक्रमणों से निपटने के लिए विशेष निगरानी टीमों को तैनात किया जाएगा।

 इंदौर की घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। सरकार ने इसे सुधारने के लिए पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम तेजी से लागू होकर आम मरीजों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा पाएगा या फिर यह केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। जनता और विशेषज्ञों की नजर अब सरकार की कार्यवाही पर टिकी हुई है।