गरबा महोत्सव पर सख्त पाबंदियां: बिना तिलक और आधार कार्ड के एंट्री नहीं

भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा में इस बार गरबा महोत्सव में प्रवेश को लेकर विशेष नियम लागू किए गए हैं। गरबा समितियों ने इस बार दूसरे समुदाय के लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोजकों का दावा है कि ये कड़े कदम ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए हैं।

गरबा पांडाल में दूसरे समुदाय की एंट्री बैन

शहर में 60 से अधिक स्थानों पर आयोजित हो रहे गरबा महोत्सवों के लिए यह निर्णय लिया गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों ने गरबा समितियों के साथ बैठकें कर यह फैसला लिया है। इन आयोजनों को पूरी तरह से हिंदू आयोजन बताते हुए, आयोजकों ने दूसरे समुदाय के लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

प्रवेश के लिए ये नियम लागू

पांडाल में प्रवेश के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा:

गरबा स्थल पर आने वाले हर व्यक्ति का आधार कार्ड चेक किया जाएगा।

प्रवेश से पहले सभी को तिलक लगाया जाएगा।

महिलाओं और युवतियों के लिए पारंपरिक परिधानों में आना अनिवार्य होगा; जींस और टी-शर्ट पर प्रतिबंध रहेगा।

आयोजकों ने बताया कि पांडालों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव भी किया जाएगा।

‘लव जिहाद रोकने के लिए उठाए गए कदम

बजरंग दल के सह विभाग संयोजक आशीष दाधीच ने बताया कि देशभर में लव जिहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे समुदाय के लोग गरबा पांडालों में आकर मां-बहनों के साथ छेड़छाड़ करते हैं और उन्हें फंसाते हैं। इसी को देखते हुए, इस बार *विहिप और बजरंग दल* के कार्यकर्ता प्रवेश द्वार पर मौजूद रहेंगे, जो आने वाले हर व्यक्ति की जांच करेंगे।

महिलाओं से पारंपरिक परिधान पहनने की अपील

गरबा समिति की महिला सदस्य खुशबू शुक्ला ने बताया कि उनकी टीमें वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए महिलाओं से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने अपील की है कि देवी मां की आराधना के इस पर्व में शालीन और पारंपरिक ड्रेस पहनकर आएं और जींस या शॉर्ट टॉप जैसे वस्त्रों से बचें। इस संबंध में पांडाल के मुख्य द्वार पर बैनर भी लगाए जाएंगे।