वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने शुक्रवार को संकेत दिया कि भारत रूस से एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के अतिरिक्त बैच खरीदने पर विचार कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में इस प्रणाली के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए यह निर्णय लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान इस खरीद पर चर्चा हो सकती है। भारत ने 2018 में रूस से पांच एस-400 प्रणालियों का सौदा किया था, जिनमें से तीन की आपूर्ति हो चुकी है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि एस-400 एक प्रभावी हथियार प्रणाली है, जिसने बेहतरीन परिणाम दिए हैं, और इसकी और इकाइयों की जरूरत है, हालांकि उन्होंने खरीद की संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की।
वायुसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि भारत अपनी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रहा है, जिसमें तीनों सेनाएं मिलकर काम कर रही हैं। यह परियोजना महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के साथ-साथ दुश्मन के किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को इस स्वदेशी प्रणाली के विकास की घोषणा की थी। सिंह ने कहा कि स्वदेशी प्रणाली के विकास के साथ-साथ एस-400 जैसे विदेशी सिस्टम की खरीद पर भी विचार किया जाएगा, ताकि वायु रक्षा को और मजबूत किया जा सके।
वायुसेना की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए सिंह ने बताया कि ‘रोडमैप-2047’ के तहत वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 35 से 40 नए विमान, जिसमें लड़ाकू विमान शामिल हैं, हासिल करेगी। 114 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की खरीद योजना में राफेल एक प्रमुख विकल्प है, क्योंकि यह पहले मूल्यांकन में सबसे उपयुक्त पाया गया था। इसके अलावा, रूस का एसयू-57 भी एक संभावित विकल्प है। उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) की पहली उड़ान 2028 तक होने की उम्मीद है और इसे 2035 तक वायुसेना में शामिल किया जाएगा।
अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के बयान, “ड्रोन युद्ध का भविष्य हैं, मानवयुक्त विमान नहीं,” को खारिज करते हुए सिंह ने कहा कि दुनिया में छठी पीढ़ी के मानवयुक्त विमान कार्यक्रम, जैसे यूएस नेक्स्ट जेनरेशन एयर डोमिनेंस, चल रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि निकट भविष्य में मानवयुक्त विमानों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि किसी संघर्ष को कैसे शुरू और जल्द समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्धों का हवाला देते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण दुनिया के लिए एक उदाहरण है।