भारत आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मना रहा है। यह दिन देश के प्रथम शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस हर साल आयोजित किया जाता है।
मौलाना आजाद एक विद्वान, पत्रकार और राजनेता थे। उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1947 से 1958 तक शिक्षा मंत्री रहते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थानों की स्थापना में योगदान दिया। उनकी दूरदर्शिता आज भी प्रासंगिक है, जहां उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का थीम “शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण” है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत सरकार डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और समावेशी शिक्षा पर जोर दे रही है। स्कूलों, कॉलेजों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सेमिनार, वेबिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। कई राज्यों में छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार वितरण और निबंध प्रतियोगिताएं हो रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद डिजिटल डिवाइड को कम करना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइस की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाएं जैसे पीएम ई-विद्या और दीक्षा पोर्टल चल रही हैं। इससे लाखों छात्रों को लाभ मिल रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में शिक्षा के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिक्षा न केवल ज्ञान देती है, बल्कि सपनों को पंख भी प्रदान करती है।” शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि इस दिन छात्रों को मौलाना आजाद के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हमें याद दिलाता है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। लिंग, जाति या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।