स्वदेशी ‘शेर AK-203’ राइफल दिसंबर से बॉर्डर पर तैनात, INSAS को कहेगा अलविदा

भारतीय सेना के जवानों को अब सीमा पर देश में बनी स्वदेशी राइफल की ताकत मिलेगी। सेना ने दशकों पुरानी INSAS (इंसास) राइफल को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उसकी जगह स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘शेर AK-203’ राइफल को सौंपने की तैयारी कर ली है। इसका सफल ट्रायल राजस्थान से सटे बॉर्डर इलाकों में पूरा होने के बाद सेना ने इसे मंजूरी दे दी है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक इसे जवानों को सौंप दिया जाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी छलांग: 70% स्वदेशी

‘शेर AK-203’ राइफल का निर्माण उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित इंडो-रूसी राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) की फैक्ट्री में किया जा रहा है। यह संयुक्त उपक्रम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत एक बड़ी उपलब्धि है:

सेना द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, यह राइफल अब 70 प्रतिशत भारतीय स्टील और कलपुर्जों से तैयार की जा रही है। IRRPL ने घोषणा की है कि दिसंबर 2025 तक इसे पूरी तरह से 100% स्वदेशी संसाधनों से बनाया जाएगा। नई ‘शेर’ राइफल पुराने इंसास के 5.56 मिमी कैलिबर की जगह 7.62 मिमी कैलिबर की अधिक शक्तिशाली और प्रभावी गोली का उपयोग करेगी, जिससे जवानों को बेहतर थ्रू पुट और उच्च विश्वसनीयता मिलेगी।

यह कदम भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।