केरल की राजनीति में शनिवार, 3 जनवरी 2026 को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब तिरुवनंतपुरम की एक स्थानीय अदालत ने पूर्व परिवहन मंत्री और एलडीएफ (LDF) विधायक एंटनी राजू को चर्चित ‘अंडरवियर साक्ष्य छेड़छाड़’ मामले में दोषी करार दिया। साढ़े तीन दशकों तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले ने राजू के राजनीतिक करियर पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 1990 का है, जब तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एंड्रयू साल्वातोर सर्वेली को अपने अंतर्वस्त्र (अंडरवियर) में नशीला पदार्थ (61.5 ग्राम चरस) छिपाकर तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय एंटनी राजू एक युवा वकील थे और उन्होंने सर्वेली का केस लड़ा था। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सर्वेली को 10 साल की सजा सुनाई।
मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब केरल हाई कोर्ट में अपील के दौरान यह पाया गया कि साक्ष्य के रूप में पेश किया गया अंडरवियर विदेशी नागरिक सर्वेली को फिट नहीं आ रहा था (वह आकार में बहुत छोटा था)। इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए हाई कोर्ट ने सर्वेली को बरी कर दिया और वह ऑस्ट्रेलिया वापस चला गया।
12 साल की जांच और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
बाद में ऑस्ट्रेलियाई इंटरपोल से मिली जानकारी और सतर्कता जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि साक्ष्य के रूप में रखे गए अंडरवियर के साथ छेड़छाड़ की गई थी। आरोप लगा कि राजू ने कोर्ट क्लर्क जोस (प्रथम आरोपी) के साथ मिलकर साक्ष्य को काटकर और दोबारा सिलकर छोटा कर दिया था।
1994 में एफआईआर दर्ज हुई, 2006 में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन कानूनी दांव-पेच के कारण मामला अटका रहा। नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसने तकनीकी आधार पर राजू के खिलाफ कार्यवाही रोक दी थी। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट को एक साल के भीतर मामला निपटाने का निर्देश दिया था।
अब क्या होगा?
नेदुमंगडु न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एंटनी राजू और कोर्ट क्लर्क जोस को आपराधिक साजिश (120B), साक्ष्य मिटाने (201) और जालसाजी (193) जैसी गंभीर धाराओं में दोषी पाया है।
इन धाराओं के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। अभियोजन पक्ष ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत से सजा सुनाने का अनुरोध किया है। यदि लंबी सजा सुनाई जाती है, तो एंटनी राजू को सीधे जेल भेज दिया जाएगा और उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।