बिहार: चेहरा ढककर ज्वेलरी दुकान में प्रवेश नहीं, सर्राफा एसोसिएशन का सुरक्षा नियम

बिहार में सोने-चांदी के व्यापारियों ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य की ज्वेलरी दुकानों में चेहरा पूरी तरह ढककर आने वाले किसी भी ग्राहक को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसमें हिजाब, नकाब, बुर्का, हेलमेट, मास्क या घूंघट शामिल हैं। यह नियम ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) की बिहार इकाई द्वारा लागू किया गया है और राज्य में इसे पहली बार पूरे स्तर पर अपनाया जा रहा है।

नियम की मुख्य बातें

फेडरेशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि यह कदम किसी विशेष धर्म या समुदाय को लक्ष्य करने के लिए नहीं है। ग्राहकों से सिर्फ खरीदारी के दौरान चेहरा स्पष्ट दिखाने का विनम्र अनुरोध किया जाएगा। दुकान कर्मचारी किसी को जबरन कपड़ा उतारने के लिए मजबूर नहीं करेंगे। यदि ग्राहक सहयोग नहीं करता तो ज्वेलरी दिखाई या बेची नहीं जाएगी। यह नियम पुरुषों पर भी लागू होता है, जैसे हेलमेट या स्कार्फ से चेहरा छिपाने वालों पर। दुकानों के बाहर नोटिस लगाए जा रहे हैं, जिनमें स्पष्ट लिखा है कि चेहरा ढककर प्रवेश वर्जित है।

सुरक्षा क्यों जरूरी बताई गई?

व्यापारियों के अनुसार, सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं – 10 ग्राम सोना करीब 1.4 लाख रुपये और एक किलो चांदी 2.5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में लूटपाट और चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। कई मामलों में अपराधी चेहरा ढककर ग्राहक बनकर दुकान में घुसते हैं और वारदात करते हैं। सीसीटीवी में पहचान न होने से पुलिस जांच भी प्रभावित होती है। पिछले साल भोजपुर और सिवान में बड़ी लूट की घटनाएं हुई थीं। वर्मा ने पटना के पुलिस अधिकारियों से चर्चा की, जिन्होंने इस पर कोई ऐतराज नहीं जताया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस फैसले ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि सुरक्षा का बहाना बनाकर मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक प्रथा को निशाना बनाया जा रहा है। यह संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ सकता है। उन्होंने व्यापारियों से नियम वापस लेने की अपील की।

जनता दल (यूनाइटेड) की प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा कि ऐसे नोटिस से हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिलाएं असहज महसूस करेंगी, जो कारोबार के लिए भी ठीक नहीं।भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भारत इस्लामिक देश नहीं है और सुरक्षा मामलों में पहचान जरूरी है।

आगे की स्थिति

यह नियम कई अन्य राज्यों में पहले से आंशिक रूप से लागू है, जैसे उत्तर प्रदेश के झांसी में हाल ही में फैसला हुआ। बिहार में इसे पूरे राज्य में लागू करने से बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह नियम कितनी प्रभावी ढंग से लागू होता है और क्या इससे अपराध कम होते हैं। राज्य की करीब 18 प्रतिशत मुस्लिम आबादी को ध्यान में रखते हुए सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।