राजधानी दिल्ली के पुरानी दिल्ली क्षेत्र में स्थित तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान से सटे इलाके में बुधवार तड़के अवैध कब्जे हटाने का अभियान चलाया गया। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम (एमसीडी) की टीम ने यह कार्रवाई की, जिसमें सदियों पुरानी फैज-ए-इलाही मस्जिद से लगी सरकारी जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त किया गया।
यह अभियान मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे शुरू हुआ। एमसीडी ने 17 से 30 के बीच बुलडोजरों की मदद से करीब 36,000 से 39,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैले अवैध निर्माणों को गिराया। इनमें बारात घर का हिस्सा, कुछ दुकानें, एक डिस्पेंसरी और अन्य अनधिकृत संरचनाएं शामिल थीं। अधिकारियों ने साफ किया कि मस्जिद का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहा और केवल उसके आसपास की अतिक्रमित जमीन को ही खाली कराया गया।
कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जो जल्द ही हिंसक हो गया। भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके। इस पथराव में कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें मामूली चोटें आईं। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए आंसू गैस के गोले दागे और भीड़ को तितर-बितर किया।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, पत्थरबाजी में 25-30 लोग शामिल थे। घटना के बाद एफआईआर दर्ज की गई और सीसीटीवी फुटेज तथा बॉडी कैमरों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। अब तक 5 से 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।
यह अभियान दिल्ली हाईकोर्ट के नवंबर 2025 के आदेश पर आधारित था, जिसमें रामलीला मैदान क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। मस्जिद प्रबंधन समिति ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। प्रशासन ने पहले अमन कमेटी और स्थानीय लोगों से बातचीत कर शांतिपूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। फिलहाल इलाके में सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है और जांच जारी है।