मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जल प्रदूषण को लेकर एक बेहद डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। शहर के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर में लिए गए ग्राउंड वाटर (भूजल) के सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। इन सैंपलों में जानलेवा ‘ई-कोलाई’ (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है। यह वही बैक्टीरिया है जिसकी वजह से हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में 20 लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ने आनन-फानन में इन इलाकों में भूजल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
कुएं में मिल रहा सीवेज, 2,000 लोग पी रहे गंदा पानी
नगर निगम के दावों के विपरीत खानूगांव क्षेत्र में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। पार्षद प्रतिनिधि ने वीडियो साक्ष्यों के जरिए खुलासा किया है कि किस तरह सीवेज का गंदा पानी सीधे उस कुएं में रिस रहा है, जहां से क्षेत्र की करीब 2,000 की आबादी को पानी सप्लाई किया जाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि 15 दिन पहले लिखित शिकायत देने के बावजूद नगर निगम ने कोई सुध नहीं ली। इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने भी निगम के इंजीनियरों को आड़े हाथों लेते हुए कड़ी फटकार लगाई है।
आदमपुर कचरा खंती के आसपास के 5 गांवों में रहने वाले 4,000 से अधिक लोग शुद्ध हवा और पानी के लिए तरस रहे हैं। कचरे के पहाड़ के कारण करीब 800 मीटर के दायरे में भूजल और हवा पूरी तरह दूषित हो चुकी है। पर्यावरणविदों द्वारा इस मामले को एनजीटी (NGT) में भी ले जाया गया है, क्योंकि प्रदूषण के कारण खेतों की उत्पादन क्षमता भी लगातार घट रही है। बुधवार को हुए परीक्षण में आदमपुर खंती के पास से लिए गए 2 सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए।
22 वार्ड ‘डेंजर जोन’ में: सड़ी पाइपलाइनें बनीं मुसीबत
शहर की जल प्रदाय व्यवस्था पर हुए शोध में यह सामने आया है कि भोपाल के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं, जहां 400 किलोमीटर लंबी लोहे की पाइपलाइनें अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। नवीबाग, गोविंदपुरा, शाहजहांनाबाद और करोंद जैसे इलाकों में पानी की पाइपलाइनें सीवेज लाइनों के समानांतर बिछी हुई हैं। पुरानी और जर्जर होने के कारण इन पाइपों में लीकेज आम बात है, जिससे सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है। इस 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को बदलने के लिए फंड की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
ई-कोलाई: क्यों है यह इतना खतरनाक?
ई-कोलाई बैक्टीरिया का परिवार पेट में गंभीर संक्रमण पैदा करता है। यह न केवल डायरिया और उल्टी का कारण बनता है, बल्कि गंभीर स्थिति में यह किडनी (गुर्दे) को पूरी तरह फेल कर सकता है, जो अंततः मरीज की मौत का कारण बनता है। भोपाल नगर निगम ने वर्तमान में शहर भर से एक हजार से ज्यादा सैंपल लिए हैं और अवैध कॉलोनियों में भूजल के स्रोतों से दूरी बनाने की सलाह दी है।