एमपी की हवा में ‘जहर’ का अलर्ट: पराली जलाने में पंजाब-हरियाणा से आगे निकला प्रदेश; NGT ने सरकार से मांगा जवाब—क्यों नहीं लागू हुआ ग्रैप?

मध्य प्रदेश में जल संकट के बाद अब ‘वायु आपातकाल’ जैसे हालात बन गए हैं। भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों की जहरीली होती हवा को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित कर दिया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया है और पूछा है कि प्रदेश की जनता को घुट-घुट कर जीने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है।

NGT का हंटर: ‘दिल्ली जैसा ग्रैप एमपी में क्यों नहीं?’

जस्टिस शिवकुमार सिंह की बेंच ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इन 8 शहरों को पहले ही ‘नॉन-अटेन्मेंट’ (मानकों पर खरे न उतरने वाले) घोषित कर रखा है, तो यहां दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर ग्रैप (Graded Response Action Plan) लागू क्यों नहीं किया गया?

पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी बनाई गई है। कमेटी को 6 हफ्ते में रिपोर्ट देनी है और 18 मार्च को मामले की अगली बड़ी सुनवाई होगी।

एमपी बना ‘नया पंजाब’: पराली के धुआं ने ढका आसमान

कभी पंजाब और हरियाणा को पराली के लिए जिम्मेदार माना जाता था, लेकिन अब मध्य प्रदेश इस मामले में देश में सबसे आगे निकल गया है।

अकेले सीहोर, रायसेन और विदिशा जिलों में पराली जलाने के 31,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। खेतों से उठने वाला यह धुआं ठंड के मौसम में हवा की निचली सतह पर जम गया है, जिससे विजिबिलिटी और सांस लेने की क्षमता दोनों प्रभावित हो रही हैं।

इन 5 मोर्चों पर फेल हुआ सिस्टम

प्रदूषण को बेकाबू करने के लिए मुख्य रूप से ये कारक जिम्मेदार पाए गए हैं:

  1. निर्माण की लापरवाही: मेट्रो और स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट्स में धूल रोकने के लिए ‘ग्रीन नेट’ या पानी के छिड़काव जैसे नियमों का पालन नहीं हो रहा।
  2. सड़कों पर ‘खटारा’: बिना PUC (प्रदूषण प्रमाण पत्र) के दौड़ते हजारों डीजल ऑटो और 15 साल पुराने वाहन हवा में जहर घोल रहे हैं।
  3. लैंडफिल की आग: आदमपुर और भानपुर जैसी कचरा खंतियों में सुलगता कचरा जहरीली गैसों का मुख्य स्रोत है।
  4. औद्योगिक धुआं: उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर मॉनिटरिंग का अभाव।
  5. पटाखे और कचरा: ठंड बढ़ने के साथ ही खुले में कचरा जलाने की घटनाओं में 40% की बढ़ोतरी हुई है।

8 शहरों की सूची जो ‘डेंजर जोन’ में हैं:

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सिंगरौली।