प्रदेश की सबसे बड़ी ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी; रिटायर्ड रजिस्ट्रार को 31 दिन तक घर में कैद रख लूटे 1.12 करोड़

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नए साल का सबसे सनसनीखेज साइबर अपराध सामने आया है। ठगों ने आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर 75 वर्षीय एक रिटायर्ड रजिस्ट्रार को 31 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और उनके जीवन की जमा-पूंजी से 1.12 करोड़ रुपये ठग लिए। यह पूरा घटनाक्रम 16 नवंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच चला।

ऐसे बुना गया ठगी का जाल

खेड़ापति कॉलोनी निवासी बिहारी लाल गुप्ता (75) को 16 नवंबर को एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को ‘ट्राई’ (TRAI) अधिकारी बताकर डराया कि उनका आधार और मोबाइल नंबर बंद होने वाला है क्योंकि वे एक गंभीर अपराध में शामिल हैं। इसके तुरंत बाद पुलिस की वर्दी पहने एक युवक ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया, जिसने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया।

ठग ने बुजुर्ग को धमकाया कि मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनका बैंक खाता 2 लाख रुपये में बेचा गया है और उससे करोड़ों का अवैध लेनदेन हुआ है। बुजुर्ग के चारों बेटे बाहर मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करते हैं और वे घर में पत्नी के साथ अकेले थे, जिसका फायदा उठाकर ठगों ने उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ दिया।

31 दिन की मानसिक प्रताड़ना और ‘रिजर्व बैंक’ की फर्जी रसीदें

बुजुर्ग को घर के एक कमरे में रहने और किसी को कुछ न बताने के लिए मजबूर किया गया। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उनके बैंक बैलेंस की जानकारी ली और जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में 1.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। विश्वास जीतने के लिए जालसाजों ने उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फर्जी रसीदें भी व्हाट्सएप पर भेजीं।

जागरूकता वीडियो ने खोला राज

इस लंबी ठगी का खुलासा तब हुआ जब दो दिन पहले बुजुर्ग ने मोबाइल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ से सावधान रहने वाला एक वीडियो देखा। वीडियो देखते ही उन्हें अहसास हुआ कि वे शिकार बन चुके हैं। रविवार शाम पीड़ित ने ग्वालियर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके बैंक खातों को ट्रेस करना शुरू कर दिया है।