दक्षिण कोरिया के इतिहास में आज एक अभूतपूर्व मोड़ आया जब सियोल की एक अदालत ने महाभियोग का सामना कर चुके पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला साल 2024 में उनके द्वारा लगाए गए असफल मार्शल लॉ से जुड़े चार मुकदमों में से पहले मामले में आया है। अदालत ने यून को शक्तियों के दुरुपयोग, न्याय में बाधा डालने और दस्तावेजों की हेराफेरी का दोषी पाया है। जज ने फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की कि जिस व्यक्ति का कर्तव्य संविधान की रक्षा करना था, उसने ही उससे पीठ फेर ली और अपने किए पर कोई पछतावा भी नहीं दिखाया।
शक्तियों के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों का आरोप सिद्ध
सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि यून ने मार्शल लॉ के दौरान अपनी गिरफ्तारी रोकने के लिए राष्ट्रपति के अंगरक्षकों का गलत इस्तेमाल किया और कैबिनेट से सलाह लिए बिना ही सैन्य शासन की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने एक फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवाया था जिसमें यह झूठा दावा किया गया था कि उनके इस फैसले को प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का समर्थन प्राप्त है। हालांकि दिसंबर 2024 में उनकी इस कोशिश के तुरंत बाद सांसदों ने संसद पहुंचकर उनके फैसले को पलट दिया था, जिससे देश एक बड़े राजनीतिक संकट से बच गया था।
विद्रोह का मुख्य मामला अभी लंबित, मौत की सजा की मांग
शुक्रवार को आया यह फैसला यून के लिए केवल शुरुआत भर है क्योंकि उन पर ‘विद्रोह’ का सबसे गंभीर मुकदमा अभी भी चल रहा है, जिसमें अभियोजकों ने उनके लिए मौत की सजा की मांग की है। उस हाई-प्रोफाइल मामले का फैसला फरवरी में आने की उम्मीद है। इस बीच, कोर्ट के बाहर दक्षिण कोरिया की जनता दो गुटों में बंटी नजर आई, जहाँ एक तरफ उनके समर्थक “मेक कोरिया ग्रेट अगेन” के नारे लगा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का जश्न मना रहे थे।
अपील के लिए सात दिन का समय और राजनीतिक भविष्य
अब दोनों पक्षों के पास अपील के लिए सात दिन का समय है, लेकिन फिलहाल यून सुक येओल, पार्क ग्युन-हे के बाद जेल जाने वाले देश के दूसरे पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं। अभियोजकों ने 10 साल की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सभी पहलुओं को देखते हुए 5 साल का कारावास सुनाया है। इस फैसले के बाद दक्षिण कोरिया की राजनीति में भविष्य के समीकरणों को लेकर बहस तेज हो गई है।