क्या आप जानते हैं कि आपके मुंह की सेहत का सीधा संबंध आपके लिवर से है? एक हालिया वैज्ञानिक शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुंह में रहने वाले बैक्टीरिया न केवल आपके पेट (गट हेल्थ) को बिगाड़ सकते हैं, बल्कि एडवांस्ड क्रोनिक लिवर डिजीज (ACLD) के खतरे की भविष्यवाणी भी कर सकते हैं।
बीमारी बढ़ने पर एक जैसे हो जाते हैं बैक्टीरिया
जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) के वैज्ञानिकों ने ‘नेचर माइक्रोबायोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि लिवर की बीमारी बढ़ने के साथ ही हमारे मुंह और पेट के बैक्टीरिया के स्वरूप में बड़ा बदलाव आता है।
- स्वस्थ लोग: इनके मुंह और पेट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया पूरी तरह अलग-अलग प्रजातियों के होते हैं।
- लिवर के मरीज: बीमारी बढ़ने पर मुंह के बैक्टीरिया पेट में जाकर अपनी जगह बनाने लगते हैं। अंततः मरीज के लार और मल (Stool) में एक ही तरह के बैक्टीरिया के स्ट्रेन पाए गए।
आंतों की सुरक्षा कवच को तोड़ते हैं ये बैक्टीरिया
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये बैक्टीरिया पेट में जाकर कोलेजन को नष्ट करने वाले एंजाइम पैदा करते हैं। ये एंजाइम आंतों की उस दीवार को कमजोर कर देते हैं जो गंदगी और बैक्टीरिया को शरीर के अन्य अंगों तक पहुँचने से रोकती है।
जब यह दीवार टूटती है, तो हानिकारक बैक्टीरिया और उनके टॉक्सिन्स सीधे लिवर तक पहुँच जाते हैं, जिससे लिवर की सूजन और बीमारी और अधिक गंभीर हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही कारण है कि दुनिया भर में हर साल करीब 20 लाख लोग लिवर रोगों से अपनी जान गंवा देते हैं।
इलाज के क्षेत्र में नई क्रांति की उम्मीद
किंग्स कॉलेज लंदन के डॉ. विशाल पटेल का कहना है कि यह खोज भविष्य में लिवर के इलाज के लिए वरदान साबित हो सकती है। अब डॉक्टर लिवर की स्थिति का पता लगाने के लिए केवल पेट ही नहीं, बल्कि मुंह के ‘माइक्रोबायोम’ की भी जांच कर सकेंगे। यदि हम समय रहते मुंह की सेहत सुधार लें या आंतों की सुरक्षा परत को बहाल कर दें, तो लिवर की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।