बजट से ठीक एक दिन पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश किया। इस सर्वे के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अस्थिरता के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए जीडीपी (GDP) ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष (FY26) में विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद है, जो आरबीआई (RBI) के अनुमान से भी बेहतर है।
महंगाई और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण
सर्वे में आम आदमी की थाली पर महंगाई के असर और दाल-सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजहों का विश्लेषण किया गया है। अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर यह है कि सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। वित्त वर्ष 2025 में यह 4.8% रहा, जबकि आगामी वर्ष (FY26) के लिए इसे घटाकर 4.4% करने का लक्ष्य है। घाटा कम होने का सीधा मतलब है कम महंगाई और आर्थिक स्थिरता।
खेती, नौकरी और विदेशी मुद्रा भंडार
- नौकरी: सर्वे में आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार के नए अवसरों और भविष्य की चुनौतियों का खाका खींचा गया है।
- खेती-किसानी: देश की आधी आबादी के आधार ‘कृषि’ क्षेत्र की विकास दर और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए सुझाव दिए गए हैं।
- विदेशी मुद्रा: विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को संतोषजनक बताया गया है, जो डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती प्रदान करने में सहायक है।