पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान संघर्ष के 30वें दिन अमेरिका के विभिन्न शहरों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के विरुद्ध बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। शनिवार को देश भर के छोटे-बड़े शहरों में आयोजित इन प्रदर्शनों को ‘नो किंग्स’ आंदोलन की तीसरी लहर बताया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने युद्ध को तत्काल समाप्त करने, बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण लगाने और प्रशासन की सख्त नीतियों में बदलाव की मांग की। न्यूयॉर्क के मिडटाउन मैनहट्टन, सैन फ्रांसिस्को के सिविक सेंटर, मिनेसोटा के सेंट पॉल समेत कई प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे।
मैनहट्टन में प्रदर्शनकारी ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति और आप्रवासन नीतियों के खिलाफ मार्च निकालते नजर आए, जबकि सैन फ्रांसिस्को में यूक्रेन समर्थन और मानवाधिकारों के मुद्दे पर जोर दिया गया। सेंट पॉल में हुई विशाल रैली को रॉक गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने संबोधित किया। उन्होंने हाल ही में इमिग्रेशन एजेंट्स की कार्रवाई में जान गंवाने वाले एलेक्स प्रेट्टी और रिनी गुड को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने भी संघीय नीतियों की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों के साहस की प्रशंसा की। इन प्रदर्शनों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों विचारधारा वाले राज्यों के लोग शामिल हुए, जिससे आंदोलन की व्यापक स्वीकृति स्पष्ट दिखाई दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदर्शनों के पीछे केवल मध्य पूर्व का युद्ध ही नहीं, बल्कि अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतें, महंगाई और आर्थिक मंदी भी प्रमुख कारण हैं। इजरायल-ईरान के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के तेज होने से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर खतरा बढ़ गया है, जिसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।