राजधानी के प्रसिद्ध बड़े तालाब (अपर लेक) को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को एक बार फिर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। बैरागढ़ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने अपनी टीम के साथ हलालपुरा क्षेत्र पहुंचकर तालाब किनारे बने अवैध निर्माणों पर जेसीबी चलवाई। एक फार्म हाउस की अवैध बाउंड्री वॉल को जमींदोज कर दिया गया।
प्रशासन के अनुसार, बड़े तालाब के आसपास कुल 347 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इन सभी को अगले 15 दिनों के अंदर हटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान भोज वेटलैंड नियम-2022 के तहत चलाया जा रहा है, जिसमें फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार के नए निर्माण को अवैध माना गया है।
कार्रवाई का विवरण
हलालपुरा में तहसीलदार की टीम ने तालाब के किनारे स्थित चिह्नित अवैध कब्जों पर ध्यान केंद्रित किया। यहां मुख्य रूप से फार्म हाउस से जुड़ी बाउंड्री वॉल को हटाया गया। इससे पहले सोमवार को भदभदा क्षेत्र में 9 दुकानों को ध्वस्त किया गया था। प्रशासन ने पिछले कई हफ्तों में पूरे इलाके का सर्वेक्षण पूरा किया था, जिसमें टीटी नगर, बैरागढ़, बहेटा, गौरा गांव और बिसनखेड़ी जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक उल्लंघन पाए गए।
15 दिनों का एक्शन प्लान
जिला प्रशासन ने कार्रवाई का विस्तृत शेड्यूल जारी किया है:
- 10 अप्रैल: हलालपुरा क्षेत्र में चिह्नित कब्जे
- 11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगलों के पीछे)
- 12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड (सरकारी एवं निजी भूमि)
- 15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान और मैरिज गार्डन सहित)
- 17 अप्रैल: हुजूर तहसील (सरकारी भूमि पर)
- 18-19 अप्रैल: टीटी नगर (बचे हुए अतिक्रमण)
- 20-21 अप्रैल: बैरागढ़ एवं हुजूर तहसील (अंतिम चरण)
पर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े तालाब और वन विहार नेशनल पार्क के आसपास वेटलैंड नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। कुछ कार्यकर्ता इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में भी उठाने की बात कर रहे हैं।
बड़ा तालाब भोपाल की पारिस्थितिकी और जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन का कहना है कि इस मुहिम से तालाब का जल स्तर सुधरेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने से रोका जा सकेगा। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हुई, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।