पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति अपनाने का फैसला लिया गया है।
नबन्ना में बीएसएफ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम शुभेंदु ने कहा कि जो व्यक्ति CAA के दायरे में नहीं आते, उन्हें राज्य पुलिस गिरफ्तार कर सीधे बीएसएफ के हवाले करेगी। बीएसएफ फिर बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई करेगा। CAA के अंतर्गत 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए उत्पीड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों को सुरक्षा मिलेगी।
सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने का फैसला
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लंबे समय से अटके काम को गति देने के लिए 27 किलोमीटर क्षेत्र की जमीन बीएसएफ को सौंपने की घोषणा की। इसकी प्रक्रिया दो सप्ताह के अंदर पूरी कर ली जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की कुल लगभग 2200 किलोमीटर लंबी सीमा में से बड़ी हिस्सेदारी पहले से बाड़बंदी के अधीन है, लेकिन बाकी हिस्सों में भी जल्द काम शुरू होगा। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जमीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जमीन हस्तांतरण में सहयोग नहीं मिला, जिससे सीमा पर समस्याएं बढ़ीं।
यह फैसला नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया था। शुभेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि सीमा सुरक्षा देश की सुरक्षा से जुड़ा विषय है और नई सरकार इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगी।
क्या कहा गया?
- राज्य पुलिस CAA के दायरे से बाहर के संदिग्धों को पकड़कर बीएसएफ को सौंपेगी।
- 27 किमी जमीन का हस्तांतरण शुरू, 45 दिनों में बाड़बंदी तेज होने की उम्मीद।
- बीएसएफ अधिकारियों ने इस कदम का स्वागत किया।