भोपाल: बरखेड़ा-बुदनी तीसरी रेल लाइन परियोजना वन्य जीवों के लिए मौत का ट्रैक बनता जा रहा है। यहां में नियमों के अनुसार, अंडर और ओवर पास नहीं बनने से लगातार वन्यजीवों की मौत हो रही है। पिछले 10 सालों में ट्रेनों की चपेट में आने से चार बाधों और 13 तेंदुए की कटकर मौत हुई है। 2015 से 2024 तक यहां लगभग 17 वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी रेलवे और वन विभाग की रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बरखेड़ा-बुदनी तीसरी रेल लाइन परियोजना निर्माण में रेलवे की गंभीर लावरवाही उजागर हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि इस ट्रैक पर तय गति 60 किलोमीटर है जबकि यहां मालगाड़ी 65 और यात्री गाड़ी 75 किलोमीटर प्रति घंटा से चल रही हैं। यहां पर हर एक किलोमीटर पर 30 मीटर का एनीमल पासेज बनाना अनिवार्य किया गया था, लेकिन अभी 20 अंडरपास बने हैं और चार ओवरपास का निर्माण कार्य चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रैक को बनाते समय रेलवे की सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।
इसमें राष्ट्रीय और राज्य वन्यजीव बोर्ड की शर्तों का पालन नहीं किया गया। न तो ट्रेन की गति को नियंत्रित किया गया, न ही फेंसिंग पूरी की गई है। इसके अलावा, वन्यजीवों के लिए जरूरी एनीमल पासेज भी नहीं बनाए गए हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व मप्र का प्रमुख वन क्षेत्र है, जो बाघों और तेंदुओं सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के वन्य जीवों का घर है। तेज गति से दौड़ती ट्रेनों की वजह से जानवर ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह परियोजना जंगल की जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।