अवध ओझा का राजनीति से संन्यास: “अब दिल से बोलेंगे, कोई फ़ोन नहीं आएगा!”

प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और शिक्षक अवध ओझा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ एक बार मैदान में उतरकर राजनीति को अलविदा कह दिया। अब वे फिर से अपनी पुरानी आज़ादी में वापस आ चुके हैं और इस बात से बेहद ख़ुश नज़र आ रहे हैं।

हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने बिना लाग-लपेट के बताया कि राजनीतिक पार्टी में रहते हुए उनकी अभिव्यक्ति पर जो पाबंदी लगी थी, उससे छुटकारा मिलने का सुकून उन्हें बार-बार महसूस हो रहा है। उन्होंने हँसते हुए कहा, “भाई, मैंने तय कर लिया है कि अब राजनीति से कोसों दूर रहूँगा। बहुत मज़ा आ रहा है। वहाँ तो बोलना ही बंद हो गया था। पार्टी की लाइन से एक इंच इधर-उधर नहीं बोल सकते थे। यह मत बोलो, वह मत बोलो… हम तो बोलेंगे नहीं तो मर ही जाएँगे! अब कोई फ़ोन करके नहीं बोलेगा कि यह बोलो, वह मत बोलो। अब दिल से जो निकलेगा, वही बोलेंगे।”

उन्होंने उस वायरल इंटरव्यू का भी ज़िक्र किया जब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीच में टोककर इंटरव्यू रुकवा दिया था। उस वक़्त मजबूरी में उन्हें कैमरे के सामने कहना पड़ा था कि पार्टी लाइन वही तय करेंगे, उसी के हिसाब से बोलना होगा। उस याद को ताज़ा करते हुए ओझा ने ठहाका लगाते हुए कहा, “अरे दादा, वो इंटरव्यू कितना मज़े में चल रहा था! बीच में ही रोक दिया। भगवान किसी को राजनीति न दिखाए!”

बीजेपी जॉइन करने की अफ़वाहों पर भी उन्होंने पूरी तरह ब्रेक लगा दी। साफ़ शब्दों में बोले, “ना बाबा ना! मैं कहीं टिकट नहीं माँगने वाला। राजनीति से पूरा-पूरा संन्यास।” चुनावी ख़र्च के सवाल पर मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मेरा खुद का एक पैसा नहीं लगा। सारे दोस्तों, शुभचिंतकों और प्रशंसकों ने दिल खोलकर मदद की।”

दरअसल, दिल्ली चुनाव से ठीक पहले अवध ओझा ने आम आदमी पार्टी जॉइन की थी और मनीष सिसोदिया की खाली हुई पटपड़गंज सीट से चुनाव लड़ा था। हार के बाद वे पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए और चुपचाप अपनी कोचिंग क्लासेस में लौट गए। अब उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है। उनका कहना है कि सिर्फ़ एक बार चुनाव लड़ने की जिज्ञासा और उत्सुकता थी, लेकिन मैदान में उतरते ही समझ आ गया कि यह उनका क्षेत्र बिल्कुल नहीं है।