खेलो इंडिया गेम्स फ्लॉप: कम उपस्थिति के चलते कई इवेंट्स में मेडल खाली

राजस्थान में 24 नवंबर से शुरू हुई खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की एथलेटिक्स स्पर्धाएं खिलाड़ियों की कम उपस्थिति और अव्यवस्थाओं के कारण पूरी तरह फेल साबित हो रही हैं। कई इवेंट्स में एथलीट इतने कम पहुँचे कि आयोजकों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल तक बांटना मुश्किल हो गया।

 रेस पूरी की, पर मेडल नहीं मिला!

मंगलवार को हुई पुरुषों की 400 मीटर हर्डल्स फाइनल में एक ऐसी घटना हुई जिसने इस आयोजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।

  • रिकॉर्ड टूटा, मेडल रुका: फाइनल में 8 एथलीट्स की उम्मीद थी, लेकिन स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के रुचित मोरी अकेले ट्रैक पर उतरे। उन्होंने अकेले दौड़ पूरी करते हुए 51.00 सेकेंड का बेहतरीन समय निकाला और मीट रिकॉर्ड तोड़ दिया। लेकिन, नियमों के चलते उन्हें गोल्ड मेडल नहीं दिया जाएगा।
  • खिलाड़ी का दर्द: मेडल रोके जाने पर रुचित मोरी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने मेहनत की, रिकॉर्ड बनाया। दूसरे एथलीट डोपिंग टेस्ट के डर से ट्रैक पर नहीं उतरे, तो इसकी सज़ा मुझे क्यों दी जा रही है। मेरा मेडल क्यों रोका जा रहा है।” उन्होंने अनुपस्थित खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कई इवेंट्स में मेडल रहे खाली

शुरुआत से ही इन खेलों में एथलीटों की भारी कमी देखी गई है:

  • महिला 400 मीटर: 5 एथलीट्स ने रजिस्ट्रेशन किया था, लेकिन ट्रैक पर केवल कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की मनीषा ही उतरीं। उन्होंने रेस पूरी करके गोल्ड मेडल हासिल किया, लेकिन सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल खाली रह गए।
  • पुरुष 400 मीटर: 8 नामांकन में से केवल 2 खिलाड़ी मैदान पर आए। आकाश राज ने गोल्ड और पी. अभिमन्यु को सिल्वर मिला, जबकि ब्रॉन्ज मेडल खाली रह गया।
  • महिला 5000 मीटर: 5 में से केवल 2 एथलीट्स ने भाग लिया।

 नियम: एक एथलीट है तो मेडल नहीं

टेक्निकल डायरेक्टर सावे ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार, अगर किसी इवेंट में सिर्फ एक एथलीट ही भाग लेता है, तो मेडल सेरेमनी नहीं होगी। मेडल देने के लिए कम से कम दो प्रतियोगी होने जरूरी हैं। एआईयू (Association of Indian Universities) और साई (Sports Authority of India) को इस फैसले की सूचना पहले ही दे दी गई थी।

कुल मिलाकर, पर्याप्त खिलाड़ियों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थाओं के कारण यह आयोजन फ्लॉप शो साबित हो रहा है, जिससे न केवल इन गेम्स की प्रासंगिकता पर, बल्कि इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।