हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी तहसील के राठीखेड़ा गांव में ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड की निर्माणाधीन फैक्ट्री को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों का विरोध-प्रदर्शन उग्र होने के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह आंदोलन, जो पिछले 15 महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, बुधवार (10 दिसंबर) को हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
विरोध का कारण और शुरुआत
किसानों का यह विरोध 40-मेगावाट के अनाज-आधारित एथेनॉल प्लांट को लेकर है, जिसका निर्माण चंडीगढ़ में पंजीकृत ‘ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी कर रही है। किसान संगठनों का कहना है कि यह फैक्ट्री पर्यावरण को दूषित करेगी, भूजल स्तर को प्रभावित करेगी, और उपजाऊ कृषि भूमि को बंजर बना देगी, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। कंपनी का दावा है कि यह परियोजना केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का हिस्सा है और सभी पर्यावरणीय मानदंडों का पालन किया जा रहा है। विरोध की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई थी और जुलाई 2025 में बाउंड्री निर्माण शुरू होने पर यह तेज हो गया।
हिंसक झड़प और नुकसान
बुधवार, 10 दिसंबर को किसान संगठनों द्वारा बुलाई गई महापंचायत अचानक हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों से फैक्ट्री परिसर की दीवार तोड़कर अंदर घुस गए। भीड़ ने फैक्ट्री के ऑफिस में आग लगा दी और लगभग 10 से अधिक गाड़ियों, एक जेसीबी मशीन सहित अन्य उपकरणों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस झड़प में संगरिया से कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित महिलाओं और किसानों समेत 70 से अधिक लोग घायल हुए, जबकि 36 पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं।
वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई
शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी टिब्बी क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। प्रशासन ने उपद्रव के मामले में 107 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
गुरुवार को प्रशासन के साथ किसानों की दो दौर की वार्ता विफल रही। किसान कोर कमेटी के सदस्यों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक हनुमानगढ़ के कलेक्टर और एसपी का तबादला नहीं हो जाता, तब तक वे प्रशासन से कोई बातचीत नहीं करेंगे। कमेटी की बैठक शुक्रवार दोपहर 2 बजे टिब्बी स्थित गुरुद्वारे में होनी है।
गोलीबारी के आरोप और पलायन
आंदोलन में शामिल महिलाओं ने पुलिस पर भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान गोलियां चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस दावे के समर्थन में गुरुद्वारा सिंह सभा में गोलियों के खोल भी दिखाए हैं। इस डर और तनाव के माहौल के चलते फैक्ट्री के आस-पास रहने वाले लगभग 30 परिवारों ने अपने घरों में ताला लगा दिया है और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सुरक्षा के लिए गुरुद्वारा सिंह सभा में शरण ली है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (एडीजी वीके सिंह) ने गोलीबारी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उपद्रव को बाहरी लोगों ने भड़काया। दूसरी ओर, किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 17 दिसंबर को कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।