छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने नशे के सौदागरों की एक बड़ी और चालाकी भरी साजिश को नाकाम कर दिया है। मंगलवार को कोमाखान पुलिस ने टेमरीनाका चेकिंग प्वाइंट पर एक संदिग्ध एम्बुलेंस की तलाशी के दौरान 5 क्विंटल 20 किलो गांजा बरामद किया। बरामद किए गए मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत ₹2.60 करोड़ आंकी गई है।
दवाइयों की आड़ और गुप्त चैंबरों का मायाजाल
तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक पुरानी और जर्जर एम्बुलेंस को चुना था। वाहन के भीतर दवाइयों के 16 बड़े कार्टून रखे गए थे, जिनके नीचे गांजे के पैकेट ठूंसे हुए थे। केवल इतना ही नहीं, पुलिस को चकमा देने के लिए एम्बुलेंस की सीट के नीचे लोहे का एक विशेष गुप्त चैंबर बनाया गया था, जिसमें 14 प्लास्टिक बोरियों में गांजा भरकर रखा गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने महाराष्ट्र पासिंग एम्बुलेंस पर ओडिशा की फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था ताकि किसी को शक न हो।
भवानीपटना से नागपुर का रूट और ‘अंदरूनी रास्तों’ का दांव
एडिशनल एसपी प्रतिभा पांडेय के अनुसार, गांजे की यह बड़ी खेप ओडिशा के भवानीपटना जिले से लोड की गई थी और इसे छत्तीसगढ़ के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर ले जाया जा रहा था। तस्करों ने मुख्य राजमार्गों के बजाय अंदरूनी ग्रामीण रास्तों का उपयोग किया ताकि पुलिस की नाकाबंदी से बचा जा सके। हालांकि, सटीक मुखबिरी के आधार पर कोमाखान पुलिस पहले से ही एक्टिव थी और टेमरीनाका पर घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा।
महाराष्ट्र के तीन तस्कर गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सागर वाघ (जालना), संजीव आहिरे (औरंगाबाद) और सुशील दामाडे (औरंगाबाद) के रूप में हुई है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
छत्तीसगढ़ में तस्करी की बढ़ती घटनाएं
गौरतलब है कि ओडिशा से सटे होने के कारण महासमुंद और बलरामपुर जैसे जिले तस्करों के लिए पसंदीदा ‘ट्रांजिट रूट’ बन गए हैं। महज 9 दिन पहले बलरामपुर जिले में भी एक ट्रक से ₹6 करोड़ का गांजा पकड़ा गया था, जो ओडिशा से राजस्थान ले जाया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन दोनों मामलों के पीछे एक ही बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है।