सुप्रीम कोर्ट: कुत्ते इंसानी डर सूंघकर काटते हैं, देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि कुत्ते इंसानों में डर की भावना को सूंघ लेते हैं और इसी कारण वे आक्रामक होकर काट सकते हैं। यह टिप्पणी जस्टिस नाथ ने अपने निजी अनुभव के आधार पर की।

बेंच में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से नहीं हटाने का निर्देश दिया गया है, बल्कि केवल आक्रामक या रेबीज प्रभावित कुत्तों को ही शेल्टर में रखने की बात है। कोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि कुत्ते का मूड पढ़ना असंभव है और वे कभी भी हमला कर सकते हैं।

सुनवाई में वकीलों ने इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी का मुद्दा उठाया। एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि पूरे देश में केवल पांच सरकारी शेल्टर हैं, जो मुख्य रूप से बीमार या घायल कुत्तों के लिए हैं और प्रत्येक की क्षमता सिर्फ 100 कुत्तों की है। बिना पर्याप्त शेल्टर के बड़े पैमाने पर कुत्तों को पकड़ना व्यावहारिक नहीं है।

कोर्ट ने स्थानीय निकायों की आलोचना की कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा, जिससे कुत्तों की आबादी बढ़ रही है और हमले के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विशेष चिंता जताई गई।

पशु अधिकार संगठनों की ओर से तर्क दिया गया कि कुत्तों के साथ सहानुभूति रखें तो वे हमला नहीं करते, लेकिन कोर्ट ने मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने सुझाव दिया कि संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाया जाए।यह मामला मानव अधिकारों और पशु कल्याण के बीच संतुलन की खोज कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नसबंदी, टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन ही लंबे समय का हल है। सुनवाई जारी है और आगे निर्देश आने की संभावना है।