भोपाल गैस त्रासदी का दंश झेल रही यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के इतिहास में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जेपी नगर स्थित इस परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे। फैक्ट्री के भीतर कदम रखने वाले वे प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। इस दौरान उन्होंने गैस राहत विभाग के आला अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की और 85 एकड़ में फैली इस विवादित जमीन के भविष्य के उपयोग को लेकर नई रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए।
कांग्रेस पर तीखा प्रहार और राहुल गांधी से माफी की मांग
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस पर बेहद हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 2-3 दिसंबर 1984 की वह काली रात कांग्रेस के शासनकाल का एक अमिट कलंक है, जिसने भोपाल में मौत का तांडव मचाया था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय के मुख्य आरोपी और फैक्ट्री मालिक वारेन एंडरसन को सुरक्षित देश से बाहर भगाने में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस ऐतिहासिक गुनाह के लिए राहुल गांधी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उनकी दादी और पिता के कार्यकाल में ही इस त्रासदी को दबाने का प्रयास किया गया था।
जहरीले कचरे का निस्तारण और भविष्य का विजन
मुख्यमंत्री ने वर्तमान सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि जिस जहरीले कचरे को कांग्रेस ने दशकों तक उपेक्षित छोड़ दिया था, उनकी सरकार ने कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए पिछले साल 337 मीट्रिक टन कचरा पीथमपुर भेजकर नष्ट करवाया। उन्होंने भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि अब इस भुतहा बन चुकी जगह को कोर्ट के मार्गदर्शन में एक भव्य मेमोरियल या उपयोगी स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रशासन इस 85 एकड़ जमीन की फाइलों को खंगाल रहा है, जिसमें पुलिस विभाग ने भी डीआरपी लाइन के लिए अपनी मांग रखी है।
मुलाकात न होने से गैस पीड़ित संगठनों में मायूसी
मुख्यमंत्री के इस दौरे के बीच गैस पीड़ित संगठनों ने उनसे मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा कारणों और व्यस्तता के चलते उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। संगठन की प्रतिनिधि रचना ढिंगरा ने बताया कि वे पीड़ितों के पुनर्वास, स्वास्थ्य समिति की रुकी हुई बैठकों और पेंशन न मिलने जैसी गंभीर समस्याओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहती थीं। संगठनों का यह भी दावा है कि फैक्ट्री की जमीन के भीतर अभी भी हजारों टन कचरा दफन है, जो आसपास की 42 बस्तियों के भूजल को लगातार प्रदूषित कर रहा है, जिस पर तत्काल ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।