भोपाल में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट्स से 2 लाख लोगों को खतरा: NGT ने सरकार और नगर निगमों को दिए सख्त निर्देश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की केंद्रीय पीठ ने मध्य प्रदेश में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरों पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति श्यौ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने भोपाल का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि शहर में 50 से अधिक अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट्स संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषण लगभग 2 लाख नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहा है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि इन अवैध यूनिट्स को तत्काल नियंत्रित किया जाए या इन्हें चिन्हित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए।

माइक्रोप्लास्टिक से निपटने के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

NGT ने राज्य सरकार और नगरीय निकायों को पर्यावरण से माइक्रोप्लास्टिक हटाने के लिए आधुनिक तकनीकों के विकास और वर्तमान प्रणालियों के परीक्षण के निर्देश दिए हैं। प्रमुख निर्देशों में शामिल हैं:

  • वस्त्र, टायर और डिटर्जेंट जैसे उत्पादों के टिकाऊ डिजाइन को बढ़ावा देना।
  • कॉस्मेटिक उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और वॉशिंग मशीनों में माइक्रोफाइबर फिल्टर का उपयोग अनिवार्य करने का सुझाव।
  • जल आपूर्ति और वेटलैंड्स में माइक्रोप्लास्टिक की निगरानी साल में दो बार करना अनिवार्य होगा। साथ ही सीवेज और वर्षा जल प्रणालियों में विशेष फिल्टर और स्क्रीन लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

27 मार्च तक मांगी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट

ट्रिब्यूनल ने राज्य के पर्यावरण सचिव को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी। NGT ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और उज्जैन नगर निगमों को इस निर्देश को गंभीरता से लागू करने की चेतावनी दी है। इसके अतिरिक्त, CPCB और ICMR जैसे संस्थानों से माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर मानक विकसित करने की अपेक्षा की गई है।