मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत लगभग 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी आज भोपाल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रहे हैं। मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारी जेपी अस्पताल परिसर में एकत्र हुए हैं और जोरदार नारेबाजी कर अपनी मांगें उठा रहे हैं।
दोपहर 1 बजे से ‘न्याय यात्रा’ शुरू होने वाली है, जो मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचकर 9 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपेगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशभर में सामूहिक हड़ताल जारी रहेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से चरणबद्ध आंदोलन चल रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा मांगों को बार-बार अनदेखा किए जाने के कारण पहले काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया। अब न्याय यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक अपनी बात पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कर्मचारी बस, ट्रेन और निजी वाहनों से भोपाल पहुंच रहे हैं और सामूहिक अवकाश लेकर इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
ये आउटसोर्स कर्मचारी जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, संजीवनी क्लिनिकों और पोषण पुनर्वास केंद्रों में रिपोर्टिंग, सफाई, सुरक्षा, कुपोषित बच्चों की देखभाल सहित कई महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। संघ का दावा है कि हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा सकती है और मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का बिना शर्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजन या नियमितीकरण शामिल है। साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर स्थायी नीति बनाकर न्यूनतम 21 हजार रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख है।
9 सूत्रीय मांग पत्र में शामिल अन्य प्रमुख बिंदु हैं:
- श्रम विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का 11 महीने का एरियर भुगतान
- निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर वेतन सीधे कर्मचारी खाते में देने की व्यवस्था
- शासकीय अवकाशों का लाभ
- नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण
- स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी की सुविधा
संघ का आरोप है कि दोहरी नीतियों के कारण वर्षों से इन कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जबकि वे 12-14 घंटे ड्यूटी देकर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
पुलिस ने जेपी अस्पताल परिसर में बैरिकेडिंग लगाकर कर्मचारियों को बाहर निकलने से रोकने की तैयारी की है, जबकि कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें न्याय यात्रा निकालने की अनुमति मिली हुई है।
संघ ने कहा कि यदि आज भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो हड़ताल अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगी और इसके लिए जिम्मेदारी शासन एवं स्वास्थ्य विभाग की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि उनके भविष्य की सुरक्षा के बिना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत नहीं हो सकतीं।