भोपाल बड़ा तालाब: 153 झुग्गियां अवैध घोषित, 15 सरकारी प्लॉट पर अतिक्रमण

भोपाल का बड़ा तालाब, जिसे शहर की जीवनरेखा माना जाता है, अवैध अतिक्रमणों से गंभीर खतरे में है। हालिया सर्वे में फुल टैंक लेवल से 50 मीटर के भीतर कुल 153 झुग्गियां और अन्य निर्माण अवैध पाए गए हैं। साथ ही खानूगांव क्षेत्र में सरकारी जमीन के 15 टुकड़ों पर कब्जे की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने एनजीटी और उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद कार्रवाई तेज की है, जिसमें जल्द ही बुलडोजर चलाने की योजना है।

वेटलैंड नियमों के अनुसार, 16 मार्च 2022 के बाद एफटीएल के 50 मीटर दायरे में हुए सभी निर्माण अवैध घोषित हैं। टीटी नगर अनुभाग के अंतर्गत सेवनिया गौड़, धर्मपुरी, प्रेमपुरा, आमखेड़ा, पीपलखेड़ी, कोटरा सुल्तानाबाद और बरखेड़ी खुर्द जैसे इलाकों में कुल 108 निर्माण सामने आए हैं। इसी तरह खानूगांव के आसपास 3, हलालपुरा में 7 और कोहेफिजा में 35 निर्माण इस जोन में आते हैं।

खानूगांव, वीआईपी रोड, करबला और लालघाटी जैसे क्षेत्रों में टीमों ने अवैध संरचनाओं पर लाल निशान लगाए हैं। होली के बाद इन अतिक्रमणों को हटाने का अभियान शुरू हो सकता है। पिछले कुछ दिनों में भदभदा इलाके से कुछ कब्जे हटाए जा चुके हैं, जबकि कुल चिह्नित अतिक्रमणों की संख्या सैकड़ों में है। खानूगांव मुख्य मार्ग पर ही 45 से अधिक पक्के बड़े निर्माण हैं, जबकि सूरज नगर, हलालपुर, सलीम की चक्की रोड और बोरवन में 200 से ज्यादा झुग्गी-शैली के पक्के कमरे और सामुदायिक ढांचे बने हुए हैं।

पिछले दस वर्षों में बड़ा तालाब का तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन अधिकांश रिपोर्टों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत शहरी क्षेत्र में 50 मीटर तथा ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित है, फिर भी सैकड़ों संरचनाएं एफटीएल के निकट बनी हुई हैं। सांसद आलोक शर्मा और कलेक्टर की फटकार के बाद जिला प्रशासन ने 17 सदस्यीय टास्क फोर्स गठित की है, जो अतिक्रमण हटाने की निगरानी कर रही है।

भोपाल के 18 तालाबों को प्रदूषण और कब्जों से मुक्त कराने के लिए अलग टास्क फोर्स बनाई गई है। प्रशासन का दावा है कि सरकारी और निजी दोनों स्तर के अतिक्रमण हटाए जाएंगे, ताकि तालाब की जल धारण क्षमता और पर्यावरण संरक्षित रहे। यह कार्रवाई शहर की जल सुरक्षा और जैव विविधता को बचाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।