केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु अभियानकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जारी हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कदम लद्दाख में शांति बहाल करने, आपसी विश्वास कायम करने और सभी पक्षों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वांगचुक ने एनएसए के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया था। अब उनकी हिरासत खत्म होने से जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी का कारण
सोनम वांगचुक को पिछले साल 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद 26 सितंबर को एनएसए के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रशासन ने उन्हें हिंसा भड़काने और उकसाने का आरोप लगाया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राजस्थान के जोधपुर केंद्रीय जेल में रखा गया।
वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत विशेष संरक्षण और क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद लद्दाख के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे और नागरिक समाज व विपक्षी दलों ने एनएसए के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की थी।
सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की उम्मीद
गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र लद्दाख में स्थिरता, शांति और पारस्परिक भरोसे का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फैसला विवाद को सुलझाने और रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वांगचुक की रिहाई से केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो सकेगा।