रूस का भारत को तेल-गैस बढ़ाने का भरोसा, हार्मुज संकट में राहत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हार्मुज जलडमरूमध्य पर संभावित नाकेबंदी की आशंका के बीच रूस ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत गारंटी दी है। रूसी कंपनियां भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में और वृद्धि करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण आश्वासन दिया गया। बैठक में रूस ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी परिस्थिति में भारत की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता से पूरा करेगा।

विशेष रूप से, मार्च महीने में रूस से भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति में 90 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रूसी उप-प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात के दौरान कहा कि उनकी कंपनियां तेल के साथ-साथ लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की निरंतर और बढ़ी हुई आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।

उर्वरक क्षेत्र में भी मजबूत सहयोग

ऊर्जा के अलावा कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी रूस ने सकारात्मक संदेश दिया। मंतुरोव ने बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है। इसके अलावा, यूरिया उत्पादन के लिए संयुक्त परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जिससे भविष्य में भारत की उर्वरक जरूरतें और बेहतर तरीके से पूरी हो सकेंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को व्यापार, कनेक्टिविटी और उर्वरक क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला बताया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।

रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद रूस हाल के महीनों में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा और रक्षा सहयोग भी मजबूत हो रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण कार्य निर्धारित समय पर आगे बढ़ रहा है। रक्षा क्षेत्र में भारत ने रूस से पांच अतिरिक्त एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का फैसला लिया है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह सहयोग न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाएगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के समय दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा।