मध्य प्रदेश कांग्रेस ने गेहूं खरीदी में हो रही देरी, भुगतान संबंधी दिक्कतों और अन्य किसान मुद्दों को लेकर गुरुवार को आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे समेत प्रदेश के कई प्रमुख राजमार्गों पर चक्का जाम का कार्यक्रम आयोजित किया। पार्टी ने इसे किसानों के हक की लड़ाई बताया जबकि सरकार ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शाजापुर जिले के रोजवास टोल प्लाजा पर प्रदर्शन की अगुवाई की। उन्होंने कहा कि किसान मंडियों में भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं, टोकन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है और भावांतर भुगतान में भी अनियमितताएं हो रही हैं। पटवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और अधिक तेज तथा व्यापक किया जाएगा।
शाजापुर में रोजवास टोल पर बड़ी संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हुए। ट्रैक्टरों को हटाने के मुद्दे पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर नोकझोंक हुई। जीतू पटवारी सहित अन्य नेताओं ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। भिंड जिले में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प की खबर आई, जहां पुलिस ने जाम हटाने की कोशिश की तो तनाव पैदा हो गया।
इंदौर बायपास, महू, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, खलघाट समेत कई अन्य इलाकों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जाम लगाया, जिससे सामान्य यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने मुख्य रूप से गेहूं की खरीदी में सुधार, MSP पर त्वरित खरीद, भावांतर राशि और बकाया भुगतान की गारंटी तथा फसल खरीदी के लिए सात दिनों के अंदर भुगतान व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के इस कार्यक्रम को चुनावी स्टंट बताया और दावा किया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन सुचारू रूप से चल रहा है तथा किसानों की मदद के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई जगहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। शाम तक अधिकांश स्थानों पर जाम हटा लिया गया और यातायात सामान्य होने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश में किसान मुद्दों को लेकर कांग्रेस का प्रमुख राजनीतिक कदम माना जा रहा है, जो आगे और विस्तार ले सकता है।