मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को भोपाल में मातमी जुलूस निकलने शुरू हो गए। करबला की घटना की याद में निकाले जा रहे इन जुलूसों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शहर के विभिन्न इलाकों से ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी झंडों के साथ जुलूस रवाना हुए। पुलिस और प्रशासन ने पुराने शहर में सुरक्षा के मद्देनजर पुख्ता इंतजाम किए हैं।
जुलूस में खामेनेई की तस्वीर और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों वाले पोस्टर
जुलूस में शामिल कुछ युवाओं की टी-शर्ट पर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर दिखाई दी। साथ ही कई श्रद्धालुओं ने पोस्टर लेकर भाग लिया, जिनमें करबला संदेश के साथ फिलिस्तीन, मणिपुर, पहलगाम और ईरान युद्ध जैसी घटनाओं का जिक्र था।
पोस्टर पर प्रमुख संदेश था- ‘करबला- जुल्म के खिलाफ आवाज’। इसमें खामेनेई की तस्वीर के साथ यह भी लिखा था कि दुनिया में कहीं भी आतंकवाद शांति के लिए खतरा है।
जुलूसों का रूट और कार्यक्रम
सुबह से फतेहगढ़, इमामी गेट, हमीदिया रोड और करोंद इलाकों से मातमी जुलूस निकले। ये सभी जुलूस दोपहर करीब 1 से 2 बजे इमामी गेट चौराहे पर पहुंचकर एकत्र होंगे, जहां विभिन्न अंजुमनों द्वारा सामूहिक मातम किया जाएगा। इसके बाद सभी जुलूस वीआईपी रोड होते हुए करबला की ओर प्रस्थान करेंगे।
नंगे पैर चले श्रद्धालु, लोगों ने दी पानी से राहत
फतेहगढ़ इमामबाड़ा से निकले एक प्रमुख जुलूस में सैकड़ों लोग हाथों में अलम (धार्मिक झंडे) लेकर शामिल हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पैर चलते दिखे और पूरे रास्ते ‘या हुसैन’ के नारे लगाते रहे। गर्म सड़कों पर चल रहे इन श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्थानीय लोगों ने लगातार उनके पैरों पर पानी डाला ताकि उन्हें राहत मिल सके।
चौराहों पर धार्मिक तकरीरें
जुलूस के दौरान शहर के प्रमुख चौराहों पर उलेमा करबला की जंग, हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत, उनके संघर्ष और इंसानियत के संदेश पर भाषण दे रहे हैं। पूरा माहौल अकीदत और गम से भरा हुआ है।