मध्य प्रदेश में बारिश की कमी: पूर्वी क्षेत्र सूखे की चपेट में, हल्की बारिश के आसार

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में अब तक सामान्य से करीब 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। राज्य के पूर्वी हिस्सों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा है, जिससे कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, असमान बारिश का यह पैटर्न कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

प्रदेश में 1 जून से अब तक औसतन 230-240 मिमी के आसपास बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश इससे ज्यादा होनी चाहिए थी। पश्चिमी और कुछ मध्यवर्ती जिलों (जैसे भोपाल, देवास, इंदौर, सीहोर) में अच्छी बारिश ने कुल औसत को कुछ हद तक संभाला है, लेकिन पूर्वी क्षेत्र (रीवा, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट आदि) में घाटा काफी अधिक है।

पूर्वी MP में चिंताजनक स्थिति

पूर्वी मध्य प्रदेश में जून महीने के दौरान बारिश बेहद कम हुई थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में कुछ जिलों में बारिश से आंकड़ों में मामूली सुधार हुआ, लेकिन कुल मिलाकर कई इलाकों में पानी की कमी साफ दिख रही है। पश्चिमी हिस्से की तुलना में यहां फसलें प्रभावित होने का खतरा ज्यादा है।

आगे का मौसम पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं, लेकिन बड़े स्तर पर भारी बारिश की उम्मीद कम है।

जुलाई के आखिरी सप्ताह में एक मजबूत मौसम प्रणाली बनने की संभावना है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में अच्छी और भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने कुछ जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट भी जारी किया है।