नई सेवा, पुरानी बसें: MP में सुगम परिवहन पर सियासी घमासान  

मध्य प्रदेश में दो दशक बाद फिर से सरकारी बस सेवा शुरू होने के एक दिन बाद ही विवाद छिड़ गया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया था। इस मौके पर सात शहरों के लिए कुल 351 बसों को हरी झंडी दिखाई गई। लेकिन विपक्षी कांग्रेस ने इन बसों की हालत को लेकर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस का आरोप है कि कई पुरानी बसें सिर्फ बाहर से रंग-रोगन और रेडियम लगाकर नई दिखाने की कोशिश की गई है। अंदर की सीटें, फर्श और अन्य हिस्से अभी भी जर्जर हालत में हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया पर ‘खटाला बसों’ का जिक्र करते हुए कहा कि इन बसों को भी हरी झंडी दिखा दी गई। कुछ नेताओं ने रंग-रोगन के टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।

किस शहर में कितनी बसें

पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड में ये बसें चल रही हैं। कुल 351 बसों में से 120 इंटरसिटी और 231 शहर के अंदर चलने वाली हैं। इंदौर को सबसे ज्यादा 145, भोपाल को 106 और जबलपुर को 67 बसें मिली हैं। बाकी शहरों में इंटरसिटी सेवाएं शुरू की गई हैं।

सरकार का कहना है कि इन बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। कई बसें इलेक्ट्रिक भी हैं। सेवा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर चलाई जा रही है।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह छोटे बस संचालकों का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि पहले कांग्रेस सरकार के समय राज्य परिवहन व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया गया था। सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष 1500 और 2031 तक 15 हजार बसें चलाने का है। साथ ही राज्य की 75 फीसदी ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने की योजना बनाई गई है।