प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) 2.0 के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बुधवार को हुई केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (CSMC) की तीसरी बैठक में लगभग 2.35 लाख अतिरिक्त घरों के निर्माण को हरी झंडी दे दी गई है। इस स्वीकृति के साथ, PMAY-U 2.0 के अंतर्गत अब तक स्वीकृत घरों की कुल संख्या 7 लाख के आंकड़े को पार कर गई है, जो देश के शहरी वंचितों को स्थायी आवास प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
नौ राज्यों में नए आवासों का विस्तार
आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन 2,34,864 घरों को नौ राज्यों में मंजूरी दी गई है। इनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। विशेष रूप से, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को भी इस नवीनतम स्वीकृति में शामिल किया गया है, जो इन राज्यों में आवासहीन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है।
योजना के विभिन्न आयाम और कार्यान्वयन
PMAY-U 2.0 को चार प्रमुख वर्टिकल के माध्यम से लागू किया जा रहा है: लाभार्थी नेतृत्व निर्माण (BLC), भागीदारी में किफायती आवास (AHP), किफायती किराए के आवास और ब्याज सब्सिडी योजना। केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति द्वारा अनुमोदित ये नए घर, मुख्य रूप से योजना के लाभार्थी नेतृत्व निर्माण और भागीदारी में किफायती आवास वर्टिकल के अंतर्गत आते हैं। बैठक की अध्यक्षता मंत्रालय के सचिव, श्रीनिवास कटिकिथला ने की, जिन्होंने योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया।
बैठक के दौरान, कटिकिथला ने बड़े राज्यों को किफायती आवास नीति तैयार करने और AHP वर्टिकल के तहत अधिक प्रस्ताव लाने का निर्देश दिया। उन्होंने महाराष्ट्र की किफायती आवास नीति का अध्ययन करने और उसे अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपनाने की सलाह भी दी। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी परामर्श दिया गया कि वे भविष्य में खाली पड़े घरों की समस्या से बचने के लिए अनुमोदन के प्रारंभिक चरण में ही AHP वर्टिकल के तहत लाभार्थियों की पहचान करें और उन्हें शामिल करें।
समावेशी विकास और विशेष फोकस समूह
PMAY-U 2.0 के तहत स्वीकृत घरों में सामाजिक समावेशिता और लैंगिक समानता पर विशेष ध्यान दिया गया है। बुधवार को स्वीकृत घरों में, महिलाओं के सशक्तीकरण को सुनिश्चित करते हुए, अकेली महिलाओं और विधवाओं सहित 1.25 लाख से अधिक घर स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रांसजेंडरों के लिए भी 44 घर आवंटित किए गए हैं, जो समाज के इस हाशिए पर पड़े वर्ग के लिए महत्वपूर्ण सहायता है।
यह योजना विभिन्न वंचित समूहों के बीच सामाजिक समानता को भी बढ़ावा देती है। स्वीकृत घरों में, अनुसूचित जाति (SC) के लाभार्थियों के नाम पर 42,400 घर, अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभार्थियों के लिए 17,574 घर और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 1,13,414 घर आवंटित किए गए हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को PMAY-U 2.0 के एकीकृत वेब पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों के लाभार्थियों का सत्यापन और संलग्न करने और विशेष फोकस समूहों के लाभार्थियों को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी गई है।
वित्तीय सहायता और पात्रता मानदंड
PMAY-U 2.0 के तहत, देश भर के शहरी क्षेत्रों में एक करोड़ परिवारों को पक्के घर बनाने या खरीदने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का लक्ष्य है। यह योजना उन व्यक्तियों और परिवारों को सुरक्षित घर देकर उनके जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित है जिनके पास देश में कहीं भी कोई पक्का घर नहीं है। प्रत्येक आवास इकाई के लिए ₹2.50 लाख तक की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अपने सपनों का घर बनाने या खरीदने में मदद मिलती है। यह योजना शहरी भारत में आवास की कमी को दूर करने और सभी के लिए “पक्का घर” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।