मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन अभियान चलाया गया – जल गंगा संरक्षण अभियान। अभियान समापन की या बढ़ रहा है जिसका उद्देश्य सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करना है।
प्रदेश में 2334.55 करोड़ रुपये की लागत से जल गंगा की आपूर्ति अभियान के अंतरगत खेत, तालाब, नहर और डेगवेल रिचार्ज बनाए गए हैं। ये अभियान अपने अंतिम चरण में पूछ चुका है जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान को 30 मार्च को लागू किया गया जो 30 जून को ख़त्म हो जाएगा। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश 24 जून से 30 जून तक जिलों में पंचायत स्टार पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जनसंवाद भी शामिल होगा। इस अभियान के तहत बनाए गए खेत और तालाबों को राजस्व रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
समापन कार्यक्रम में अधिकारियों को शामिल किया जाएगा
जल गंगा संवर्धन अभियान अपने अंतिम चरण पर आ चूका है जिसके तहत 24 जून 2025 से 30 जून 2025 तक सभी जिलों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश अनुसार। समापन कार्यक्रम में सभी कलेक्टरों और अधिकारियों का मौजूद रहना जरूरी है। सभी अधिकारियों की भागीदारी से हर दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार होगी।
नियमित मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड बना
जल गंगा संवर्धन अभियान में कौन सा कार्य कब हो रहा है और उनमें कितनी राशि का उपयोग हो रहा है इसकी मॉनिटरिंग के लिए इस अभियान का डैशबोर्ड बनाया गया है। इसमें हर तरह की जानकारी शामिल रहेगी ताकि अभियान की परदर्शिता बनी रहे।
लक्ष्य प्राप्ति के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया
प्रदेश में पहली बार खेत, तालाब और डगवेल बनाने के लिए एआई, प्लानर सॉफ्टवेयर और सिपरी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया जिससे लक्ष्य हासिल करने मेंआसानी रही और समय रहते लक्ष्य हासिल हो गया। अभियान की प्रगति के बारे में अधिकारियों को एआई रिपोर्ट उनके व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराई जाएगी।