अपनी लापरवाही से मौत तो नहीं मिलेगा बीमा, इंश्योरेंस कंपनियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court on Insurance Policy: सड़कों पर खतरनाक और लापरवाही से ड्राइविंग करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट से सख्त संदेश आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी ड्राइवर की जान खुद की गलती से जाती है, तो इंश्योरेंस कंपनियां उसके परिवार को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं हैं।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की बेंच ने एक ऐसे व्यक्ति के परिवार को राहत देने से इनकार कर दिया जिसकी मौत तेज गति से गाड़ी चलाने के दौरान हुई थी। गाड़ी चलाते समय उसने लापरवाही बरती थी, जिसके कारण गाड़ी पलट गई थी। मृतक के परिवार ने इंश्योरेंस कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से 80 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी। बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की मौत उसकी अपनी गलती से होती है, तो उसके परिवार वाले इंश्योरेंस का पैसा नहीं मांग सकते।

हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के पिछले साल 23 नवंबर के फैसले को सही ठहराया। कर्नाटक हाई कोर्ट में परिवार ने कहा कि दुर्घटना टायर फटने के कारण हुई लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि जब मृतक के कानूनी प्रतिनिधि दावा करते हैं, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि मृतक खुद अपनी लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं था। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि मृतक पॉलिसी के अंतर्गत आता है, ताकि इंश्योरेंस कंपनी कानूनी उत्तराधिकारियों को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हो।

कोर्ट ने कहा…

कोर्ट ने आगे कहा, इस मामले में यह माना गया है कि दुर्घटना लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई। इसलिए ड्राइवर खुद ही अपनी मौत का कारण बना। इस स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारी उसकी मौत के लिए कोई मुआवजा नहीं मांग सकते। इसका मतलब है कि अगर आप खुद गलती करते हैं और आपकी जान चली जाती है, तो आपके परिवार को इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा नहीं मिलेगा।