60 करोड़ रुपये से भी बड़ा धान परिवहन घोटाला: मास्टरमाइंड दिलीप  किरार धराया, 19 अब तक गिरफ्तार

Jabalpur Paddy Transportation Scam: मध्य प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (MPSCSC) के प्रभारी ज़िला प्रबंधक दिलीप किरार को अपराध शाखा ने छतरपुर में एक रिश्तेदार के घर से गिरफ़्तार कर लिया। किरार पर 74 हज़ार रुपये का इनाम घोषित था और पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर ले लिया है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही घोटाले में गिरफ़्तार व्यक्तियों की संख्या उन्नीस हो चुकी है।

जबलपुर में 72 अफ़सर–कर्मचारी नामज़द

घोटाला उजागर होते ही कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर जबलपुर के विभिन्न थानों में 72 अधिकारियों–कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। पहले पुलिस ने किरार के जबलपुर के सराफ़ा क्षेत्र स्थित घर पर छापा मारा, लेकिन वह फरार था। गुप्त सूचना के बाद छतरपुर में दबिश देकर उसे पकड़ा गया।

फर्जी ट्रिप का जाल: 614 बार कथित परिवहन

जांच में खुलासा हुआ कि धान ढुलाई के नाम पर कुल 614 फर्जी ट्रिप दिखाए गए। 55 ऐसे वाहनों—कार, पिकअप, ट्रैक्टर व कम क्षमता वाले दूसरे वाहन—के नंबर रजिस्ट्रेशन में दर्ज थे, जिनसे एक ही दिन में कई–कई बार धान पहुंचाना तकनीकी रूप से असंभव था।

घोटाले की रकम दोगुनी हुई

शुरुआती जांच में 30 करोड़ 14 लाख 19 हज़ार रुपये मूल्य की 1 लाख 31 हज़ार 52 क्विंटल धान की हेराफ़ेरी सामने आई थी; आगे की पड़ताल में यह आंकड़ा बढ़कर क़रीब 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अतिरिक्त कलेक्टर नाथूराम गोंड की अध्यक्षता में बनी विशेष जांच समिति की रिपोर्ट ने घोटाले के पूरे ताने–बाने को उजागर किया।

धान जिले से बाहर नहीं गई, दलालों को बेची गई

इंटर–डिस्ट्रिक्ट मिलिंग के लिए जबलपुर में जमा धान को नियमों के विपरीत स्थानीय दलालों को बेच दिया गया। इस साज़िश में मिल मालिकों के साथ–साथ निगम के अधिकारी, खरीदी केंद्र के कर्मचारी और कुछ सोसायटियाँ भी शामिल थीं।

सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और जालसाज़ी

ट्रक नंबर, चालान और परिवहन विवरण छेड़छाड़ कर सरकारी दस्तावेज़ों में दर्ज किए गए। केवल पाटन थाना क्षेत्र में 2 दिसंबर 2024 से 23 जनवरी 2025 के बीच 21,129 क्विंटल धान—लगभग 4.86 करोड़ रुपये—का गबन पकड़ा गया।

अब तक गिरफ़्तार प्रमुख आरोपी

प्रभारी जिला प्रबंधक दिलीप किरार, ऑपरेटर सुनील प्रजापति, प्रभारी इश्यू सेंटर बी. एस. मेहर, राइस मिलर मनदीप सिंह, प्रतीक सक्सेना व संजय जैन, सोसायटी मैनेजर गंधर्व सिंह और रामस्वरूप रजक, कंप्यूटर ऑपरेटर शैलेन्द्र ठाकुर एवं सौरभ ठाकुर सहित कुल 19 लोगों को पकड़ा गया है। इन पर बीएनएस की धाराएँ 116/25, 61(2), 338, 336(3), 340(2), 318(4), 316(2), 316(4) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत मुक़दमा दर्ज है।

कई थानों में मुक़दमे, आगे और धरपकड़ की तैयारी

दिलीप किरार पर पाटन, कुण्डम, सिहोरा, मझगवां, मझोली, कटंगी, गोसलपुर, भेड़ाघाट, पनागर, बेलखेड़ा, बरेला और गोराबाज़ार थानों में भी गबन व धोखाधड़ी के केस दर्ज हैं। पुलिस रिमांड के दौरान उससे पूछताछ जारी है और अधिकारियों का दावा है कि नेटवर्क में जुड़े अन्य लोगों की भी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।

तफ्तीश का अगला चरण

जांच एजेंसियाँ अब फर्जी रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल हुए वाहनों के मालिकों, धान खरीद केंद्रों के रिकॉर्ड और मिलिंग उद्देश्यों के लिए जारी किये गए परमिट की कड़ियाँ खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के ऐंगल से भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अलर्ट किया जा सकता है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों पर सख़्त कार्रवाई कर सरकारी कोष को हुए नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।