एक कमरे में पांच कक्षाएं संचालित, छिंदवाड़ा में स्कूल की दुर्दशा बनी खतरे की घंटी

छिंदवड़ा

Five classes are being conducted in one room: एक कमरे में पांच कक्षाएं संचालित, छिंदवाड़ा में स्कूल की दुर्दशा बनी खतरे की घंटी जुलाई माह में स्कूलों का नया सेशन तेज़ी से शुरू हो जाता है, लेकिन बारिश के साथ ही कई सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत उजागर होने लगती है। छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विकासखंड के ग्राम गढ़ाछोटा स्थित एक प्राथमिक स्कूल इसकी एक उदाहरण है। यहां पहली से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई सिर्फ एक कमरे में करवाई जा रही है, जिसमें कुल 21 विद्यार्थी बैठते हैं और दो शिक्षक अलग-अलग विषय पढ़ाने की कोशिश करते हैं।

जाने क्या है कारण

असल में स्कूल की मुख्य बिल्डिंग इस कदर जर्जर हो चुकी है कि बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता है, जिससे पूरी फर्श पानी पानी हो जाता है। इसीलिए प्रशासन ने स्कूल भवन में ताला लगा दिया है और बगल के एक अतिरिक्त छोटे से कमरे में सभी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।

शिक्षण व्यवस्था पर प्रभाव

एक ही कमरे में पढ़ाई होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कक्षा एक के बच्चों को जब गणित पढ़ाई जाती है, तो कक्षा पांच के विद्यार्थी चुपचाप बैठे रहते हैं और जब अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती है, तो अन्य बच्चे पढ़ाई से कट जाते हैं। शोर-शराबे और ध्यान भटकने से बच्चों की सीखने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

जिले भर में 86 जर्जर स्कूल

गढ़ाछोटा अकेला उदाहरण नहीं है। जिला शिक्षा केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, जिले में ऐसे 86 प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल जर्जर अवस्था में हैं और 757 भवन मरम्मत योग्य हैं। जनवरी 2025 में इनकी सूची बनाकर मार्च में राज्य शिक्षा विभाग को फंड की मांग के साथ भेज दी गई थी। शिक्षकों ने फोटो और वीडियो के साथ भवनों की खराब हालत का दस्तावेजीकरण भी किया है, लेकिन छह महीने बीतने के बाद भी अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे जिला परियोजना समन्वयक (DPC) जेके इडपाचे ने बताया कि 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना के लिए मरम्मत और नए भवनों की मांग भेजी गई है, लेकिन अब तक कोई राशि स्वीकृत नहीं हुई है।