स्टारलिंक को भारत में मिली अंतिम मंजूरी, जियो और एयरटेल से मुकाबला करने के लिए एलन मस्क की कंपनी तैयार

Starlink In India: अरबपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी स्टारलिंक को आखिरकार भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की अंतिम नियामक मंजूरी मिल गई है। इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड अथॉराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) ने इस कंपनी को हरी झंडी दे दी है, जिससे अब यह कंपनी रिलायंस जियो और यूटेलसैट की वनवेब जैसी कंपनियों के साथ सीधे मुकाबले में होगी। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद मिली यह मंजूरी भारत के इंटरनेट सर्विस सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

IN-SPACe से मिली अंतिम हरी झंडी

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, IN-SPACe ने स्टारलिंक को पांच साल के लिए लाइसेंस जारी किया है। यह टेलीकॉम मिनिस्ट्री से मिले शुरुआती लाइसेंस के बाद अंतिम और महत्वपूर्ण कदम है। अब कंपनी को स्पेक्ट्रम प्राप्त करने, अपना इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सुरक्षा नियमों को पूरा करने के लिए परीक्षण और ट्रायल करने होंगे। यह मंजूरी स्टारलिंक के लिए एक बड़ी जीत है, जो काफी समय से भारत में अपनी सेवाओं को लॉन्च करने की कोशिश कर रही थी।

स्पेक्ट्रम आवंटन पर चली थी लंबी बहस

स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो के साथ कई महीनों तक एक बड़ा विवाद चला था। यह विवाद सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के लिए स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर था। स्टारलिंक ने तर्क दिया था कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं, बल्कि आवंटन (Allocation) किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक प्राकृतिक संसाधन है जिसे कंपनियों को आपस में साझा करना चाहिए। वहीं, रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी टेलीकॉम कंपनियों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि अगर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत कम रखी जाती है तो यह उनके मौजूदा कारोबार को नुकसान पहुंचाएगा।

दूरसंचार कंपनियों की चिंता और सरकार का रुख

दूरसंचार कंपनियों के संगठन सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने भी दूरसंचार मंत्रालय को एक पत्र लिखकर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की मूल्य निर्धारण से जुड़े प्रस्ताव की समीक्षा करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइडर्स के लिए प्रस्तावित कीमत की तुलना में, देश की टेलीकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम के लिए सरकार को लगभग 21 प्रतिशत अधिक भुगतान करती हैं। हालाँकि, सरकार ने इस मामले में स्टारलिंक का पक्ष लेते हुए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को आवंटित करने का निर्णय लिया। अब इस अंतिम मंजूरी के बाद, भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी का भविष्य सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के साथ एक नया रूप लेने के लिए तैयार है।