मालेगांव विस्फोट मामले में विशेष एनआईए अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस फैसले का स्वागत किया है। दोनों नेताओं ने इसे न सिर्फ न्याय की जीत बताया, बल्कि कांग्रेस पर करारा हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि इस मामले के बहाने ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसी झूठी अवधारणा गढ़ी गई थी, जो अब न्यायालय में तार-तार हो गई है।
उमा भारती ने साधा दिग्विजय सिंह पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने राहुल गांधी के इशारे पर ‘भगवा आतंकवाद’ जैसी शब्दावली को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि इस शब्द का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदू धर्म और साधु-संतों को बदनाम करने की कोशिश की गई थी। उमा ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों ने यह फर्जी नैरेटिव गढ़ा, उनके खिलाफ क्या कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
मुख्यमंत्री ने कहा- कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “सत्यमेव जयते… मालेगांव विस्फोट केस में सभी आरोपियों का निर्दोष साबित होना कांग्रेस की संकीर्ण सोच पर करारा तमाचा है।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को यह बात समझ लेनी चाहिए कि हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। उन्होंने इस निर्णय को सनातन संस्कृति, साधुओं और भगवा पर लगाए गए झूठे आरोपों का जवाब बताया।
रामेश्वर शर्मा बोले- हिंदू आतंकवादी नहीं हो सकता
राज्य के पूर्व प्रोटेम स्पीकर और विधायक रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस फैसले से कांग्रेस की रणनीति फिर एक बार सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जानबूझकर इस्लामी आतंकवाद से ध्यान भटकाने के लिए ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द को जन्म दिया। शर्मा के अनुसार, कांग्रेस को इस झूठ के लिए देश के हर हिंदू से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।
17 साल बाद आया फैसला, सभी आरोपी बरी
गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिल में लगे विस्फोटक से धमाका हुआ था। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, 17 वर्षों की लंबी सुनवाई के बाद मुंबई की विशेष अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस या विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है, इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।
अदालत का स्पष्ट संदेश
इस फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना उचित नहीं है। केवल धारणाओं और राजनैतिक बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि न्याय केवल ठोस साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी प्रचारित विचारधारा के प्रभाव में।
यह निर्णय न सिर्फ आरोपियों को राहत देने वाला है, बल्कि इससे देश की राजनीति में लंबे समय से चल रही ‘हिंदू आतंकवाद’ की बहस को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।